इन्फ्लूएंजा एच1एन1 पर सीएमई आयोजित, समय पर पहचान और उपचार पर जोर
एटा। वीरांगना अवंतीबाई लोधी स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध चिकित्सालय में शनिवार को मौसमी इन्फ्लूएंजा एवं एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) को लेकर सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम (सीएमई) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सकों, रेजिडेंट चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ एवं एमबीबीएस विद्यार्थियों को बीमारी के प्रसार, लक्षण, जांच, उपचार तथा संक्रमण से बचाव के संबंध में अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य एवं मुख्य अतिथि डॉ. बलवीर सिंह ने फीता काटकर किया। इस दौरान विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने इन्फ्लूएंजा एच1एन1 से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक जानकारी दी।
सतत चिकित्सा शिक्षा के प्रथम सत्र में कम्युनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार ने इन्फ्लूएंजा एच1एन1 के रोग प्रसार विज्ञान पर जानकारी दी। उन्होंने संक्रमण के स्रोत, फैलने के माध्यम, जोखिम वाले समूहों तथा संक्रमण को नियंत्रित करने के उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हाथों की नियमित सफाई, खांसते और छींकते समय श्वसन शिष्टाचार का पालन, संक्रमित व्यक्ति से अनावश्यक निकट संपर्क से बचाव तथा आवश्यकता के अनुसार मास्क का उपयोग संक्रमण की रोकथाम में सहायक है।
टीबी एवं चेस्ट विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने इन्फ्लूएंजा के लक्षण एवं उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने सामान्य एवं गंभीर लक्षणों की पहचान तथा मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार की रणनीति समझाई। उन्होंने कहा कि गंभीर लक्षण दिखाई देने पर मरीज को समय रहते उच्च चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना आवश्यक है।
पीडियाट्रिक्स विभाग के सहायक आचार्य डॉ. शिवम यादव ने बच्चों में इन्फ्लूएंजा एच1एन1 के लक्षण, गंभीर संक्रमण की पहचान और उपचार के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया। उन्होंने बच्चों में उम्र एवं वजन के अनुसार दवाओं की उचित मात्रा निर्धारित करने पर जोर दिया। साथ ही गंभीर लक्षण होने पर अभिभावकों को स्वयं दवा देने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी।
माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. योगेंद्र सिंह ने इन्फ्लूएंजा की प्रयोगशाला जांच एवं आरटी-पीसीआर के महत्व पर जानकारी दी। उन्होंने नमूना लेने की प्रक्रिया, जांच की आवश्यकता तथा किन परिस्थितियों में आरटी-पीसीआर जांच कराई जानी चाहिए, इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जांच के साथ मरीज के लक्षण एवं चिकित्सकीय स्थिति को ध्यान में रखकर निदान और उपचार किया जाना चाहिए।
फार्माकोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मंजरी कुमारी ने इन्फ्लूएंजा एवं स्वाइन फ्लू में दवाओं के उचित उपयोग पर व्याख्यान दिया। उन्होंने रोग की गंभीरता के अनुसार उपचार की विभिन्न श्रेणियों, विषाणु रोधी दवाओं एवं सहायक उपचार के तर्कसंगत उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने अनावश्यक रूप से प्रतिजैविक दवाओं के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी।
समापन अवसर पर प्राचार्य डॉ. बलवीर सिंह ने कहा कि इन्फ्लूएंजा एच1एन1 जैसे संक्रमण के नियंत्रण के लिए समय पर पहचान, उचित उपचार, संक्रमित मरीज का आवश्यकतानुसार पृथक्करण और संक्रमण नियंत्रण के नियमों का पालन बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर आवश्यकता के अनुसार मास्क का उपयोग, हाथों की स्वच्छता और श्वसन संबंधी सावधानियां संक्रमण के प्रसार को कम करने में सहायक हैं। उन्होंने अस्पताल के सभी चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों से संक्रमण की रोकथाम के निर्धारित प्रोटोकॉल का गंभीरता से पालन करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. साधना सिंह ने किया। उन्होंने विभिन्न वक्ताओं का परिचय कराया तथा सभी सत्रों का सुव्यवस्थित संचालन किया। कार्यक्रम में चिकित्सकों एवं प्रतिभागियों ने इन्फ्लूएंजा एच1एन1 की रोकथाम, प्रारंभिक पहचान, जांच, उपचार, संक्रमण नियंत्रण एवं गंभीर मरीजों के प्रबंधन से जुड़े विषयों पर चर्चा की।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मोनू यादव, डॉ. प्रशांत भारद्वाज, डॉ. राघवेंद्र, डॉ. निधि शर्मा, सहायक जनसंपर्क अधिकारी डॉ. हरी सिंह, डॉ. आशीष, नर्सिंग अधीक्षिका सुमन पात्रे सहित महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय के वरिष्ठ एवं कनिष्ठ रेजिडेंट चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, अधिकारी-कर्मचारी तथा एमबीबीएस के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

