100 वर्ष पुराने प्राचीन चित्रगुप्त मंदिर के अस्तित्व पर संकट, कायस्थ समाज में भारी रोष |

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Manoj Jauhri
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित...
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कायमगंज (फर्रुखाबाद)।

कायमगंज के मोहल्ला बजरिया रामलाल में स्थित लगभग 100 वर्ष से अधिक पुराने ऐतिहासिक भगवान चित्रगुप्त जी महाराज के मंदिर के अस्तित्व को लेकर विवाद गहरा गया है। लंगड़े बाबा मंदिर के नाम से प्रख्यात इस प्राचीन देवस्थल में स्थापित भगवान चित्रगुप्त महाराज की बहुमूल्य अष्टधातु की मूर्ति और मंदिर भवन को लेकर कायस्थ समाज ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है।

क्या है पूरा मामला?

स्थानीय कायस्थ समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि मोहल्ले के ही स्वर्णकार समाज के कुछ लोग जीर्णोद्धार के बहाने मंदिर पर अवैध आधिपत्य (कब्जा) जमाने का प्रयास कर रहे हैं। आरोप के मुताबिक, ये लोग मंदिर में प्रतिष्ठित भगवान चित्रगुप्त जी महाराज की प्राचीन अष्टधातु की मूर्ति को उनके मूल स्थान से हटाने और उनके नाम से निर्मित ऐतिहासिक बरामदे व भवन को ध्वस्त करने पर आमादा हैं।

कायस्थ समाज का कहना है:

इस मंदिर से हमारी सदियों पुरानी आस्था जुड़ी है। यहाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी कायस्थ समाज के लोग निरंतर पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। स्वर्णकार समाज को इस मंदिर या मूर्ति के साथ छेड़छाड़ करने का कोई कानूनी या नैतिक अधिकार नहीं है, और न ही इसके लिए कायस्थ समाज से कोई अनुमति ली गई है।

प्रशासन और पुलिस से हस्तक्षेप की माँग

मामले की संवेदनशीलता और जन-आक्रोश को देखते हुए कायस्थ समाज ने स्थानीय प्रशासन और बजरिया हल्का पुलिस से तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है।

बिना अनुमति के निर्माण का प्रयास

कायस्थ समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि स्वर्णकार समाज को इस मंदिर के स्वरूप से छेड़छाड़ करने का कोई कानूनी या सामाजिक अधिकार नहीं है। इस कथित जीर्णोद्धार के लिए कायस्थ समाज से किसी भी प्रकार की अनुमति या सहमति नहीं ली गई है। यदि इस प्राचीन धरोहर को क्षति पहुंचाई गई, तो समाज चुप नहीं बैठेगा और आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

जिलाधिकारी से की गई मुख्य मांगें:

  1. प्राचीन अष्टधातु की मूर्ति को उनके मूल स्थान से कतई न हटाया जाए।
  2. भगवान चित्रगुप्त महाराज के नाम से निर्मित भवन व बरामदे को किसी भी प्रकार की क्षति न पहुँचाई जाए।
  3. मंदिर के ऐतिहासिक और धार्मिक स्वरूप को पूर्व की भांति यथावत बनाए रखा जाए।

तनाव की स्थिति, कानून व्यवस्था पर नजर

स्थानीय प्रबुद्ध जनों का कहना है कि यदि इस प्राचीन धरोहर और धार्मिक स्थल के अस्तित्व के साथ कोई भी खिलवाड़ किया गया, तो कायस्थ समाज में भारी रोष पैदा होगा, जिससे शांति व्यवस्था भंग हो सकती है। न्यायहित में यह बेहद आवश्यक है कि पुलिस और प्रशासन समय रहते इस मामले का संज्ञान ले और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या अवैध तोड़फोड़ पर तुरंत रोक लगाए।

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Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय समाचार सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
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