शमशाबाद /फर्रुखाबाद/
जनपद के ढाई घाट पर आस्था और श्रद्धा का माहौल उस समय हिंसा में बदल गया, जब श्रीमद्भागवत कथा की पूजन सामग्री विसर्जित करने पहुंचे श्रद्धालुओं और घाट पर मौजूद कुछ युवकों के बीच मोबाइल से वीडियो बनाने को लेकर विवाद हो गया। देखते ही देखते कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया और लाठी-डंडे चलने लगे। इस हमले में दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि चार अन्य लोगों को भी चोटें आईं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार अमृतपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में 27 जून से श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन चल रहा था। शनिवार को कथा का समापन और विशाल भंडारे के बाद रविवार को श्रद्धालु ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से पूजन सामग्री का विसर्जन करने ढाई घाट पहुंचे थे। इसी दौरान महिलाएं और बच्चे गंगा स्नान कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घाट पर मौजूद कुछ युवक मोबाइल फोन से महिलाओं और श्रद्धालुओं का वीडियो बनाने लगे। जब इसका विरोध किया गया तो दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि वीडियो बना रहे युवकों ने अपने अन्य साथियों को मौके पर बुला लिया। कुछ ही देर में लाठी-डंडों से लैस लोगों ने श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया। घाट पर अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे। हमले में दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि चार अन्य लोगों को मामूली चोटें आईं।
घायलों को तत्काल शमशाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद एक गंभीर घायल को डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया। अन्य घायलों का उपचार स्थानीय स्तर पर किया गया।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थल और सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की दबंगई कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। लोगों का कहना है कि यदि खुलेआम लाठी-डंडों से हमला करने वालों पर समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसे तत्वों के हौसले और बढ़ेंगे।
शमशाबाद थाना प्रभारी सचिन चौधरी ने बताया कि पुलिस को तहरीर मिल गई है। वायरल वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि घटना में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर इस बहस को जन्म दे रही है कि जब प्रदेश में अपराध और गुंडागर्दी पर सख्ती के लगातार दावे किए जाते हैं, तब सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की हिंसक घटनाएं आखिर क्यों सामने आ रही हैं। अब लोगों की निगाहें पुलिस कार्रवाई पर टिकी हैं कि आरोपी कब तक कानून के शिकंजे में आते हैं।
