फर्रुखाबाद/
अघोषित बिजली कटौती, बिना सत्यापन उपभोक्ताओं का विद्युत लोड बढ़ाकर अधिक बिल भेजे जाने और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली से नाराज लोगों का गुस्सा सोमवार को खुलकर सामने आया। फर्रुखाबाद विकास मंच के नेतृत्व में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय पहुंचकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण बंद करने की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि विभाग बिना किसी डोर-टू-डोर सर्वे और तकनीकी जांच के उपभोक्ताओं का विद्युत लोड बढ़ा रहा है, जिसके चलते लोगों को आवश्यकता से अधिक बिजली बिल भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले से ही लगातार अघोषित बिजली कटौती से आम जनता परेशान है, ऐसे में मनमाने बिलों ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
धरना-प्रदर्शन के दौरान अधीक्षण अभियंता कार्यालय में मौजूद नहीं मिले। इससे नाराज प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित अपना ज्ञापन कार्यालय के बाहर चस्पा कर विरोध दर्ज कराया। बाद में यही ज्ञापन अधिशासी अभियंता (शहर) बृजभान सिंह को सौंपा गया।
ज्ञापन में मांग की गई कि बिना डोर-टू-डोर सर्वे किसी भी उपभोक्ता का विद्युत लोड न बढ़ाया जाए, गलत तरीके से बढ़ाए गए लोड की समीक्षा कर उसे तत्काल संशोधित किया जाए तथा मनमाने बिजली बिलों की वसूली पर रोक लगाई जाए। साथ ही अघोषित बिजली कटौती समाप्त कर नियमित और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की भी मांग की गई।
अधिशासी अभियंता (शहर) बृजभान सिंह ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि लाइन शिफ्टिंग के लिए प्रस्तावित घोषित बिजली कटौती को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। यह कार्य अब अक्टूबर-नवंबर माह में कराया जाएगा, ताकि भीषण गर्मी के दौरान उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
फर्रुखाबाद विकास मंच के जिला अध्यक्ष भईयन मिश्रा ने कहा कि यदि विभाग ने बिना सर्वे लोड बढ़ाने और मनमाने बिजली बिल भेजने की कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई तो संगठन व्यापक जनआंदोलन शुरू करने को बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग की होगी।
धरना-प्रदर्शन में फर्रुखाबाद विकास मंच के पदाधिकारियों के अलावा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल रहे। प्रदर्शन के दौरान पूरे समय बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी होती रही और उपभोक्ताओं की समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग उठाई गई।
