शोपीस बने पोल्स और खुले तार दे रहे हैं हादसों को दावत, मानसून से पहले नगरवासियों में दहशत।
कायमगंज।
नगर के बीचो-बीच बिजली विभाग की घोर लापरवाही का एक ऐसा मकरजाल फैल चुका है, जो किसी भी दिन एक बड़ी मानवीय त्रासदी का कारण बन सकता है। स्थानीय अधिकारियों की बेरुखी के चलते सड़कों और गलियों में लगे बिजली के पोल अब मौत के खंभे साबित हो रहे हैं।
इन इलाकों में फैला है तारों का मकरजाल
नगर के मुख्य और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। मुख्य रूप से:
- मोहल्ला छपट्टी
- तहसील चौकी के पास
- जामा मस्जिद रोड
- आजम खां बजरिया
- बजरिया रामलाल
- पटवान गली
इन सभी इलाकों में पोल पर फैली केबिलों ने एक खतरनाक मकरजाल का रूप ले लिया है। यहाँ केबिलों के खुले जोड़ किसी भी तरह से सुरक्षित नहीं हैं। हवा चलने या आपस में भिड़ जाने पर ये केबल न सिर्फ लोकल फॉल्ट पैदा करते हैं, बल्कि लोहे के पोल में सीधे 440 वोल्ट का करंट छोड़ देते हैं।
करंट की चपेट में आया बंदर, एक जानवर ने बचाई दूसरे की जान
लापरवाही का जीता-जागता सबूत बीते कल (6 जून 2026) को जामा मस्जिद के पास देखने को मिला। यहाँ पोल पर चढ़े एक बंदर को अचानक जोरदार करंट लगा, जिससे वह बेहोश होकर सीधे जमीन पर आ गिरा। इसी बीच वहाँ मौजूद एक आवारा कुत्ते ने बेसुध बंदर पर हमला बोल दिया और उसे नोचने लगा। बंदर की सांसें उखड़ ही रही थीं कि स्थानीय लोगों ने सूझबूझ दिखाई और कुत्ते को भगाकर उस बेजुबान की जान बचाई |
स्थानीय निवासी शिवम ने बताया कि इस पोल में अक्सर करंट उतर आता है। उन्होंने मांग की कि जिस तरह मानसून से पहले नालों की सफाई की जाती है, उसी तरह बिजली विभाग को इन पोलों का भी मेंटेनेंस करना चाहिए और खुले जोड़ों पर एम-सील (M-Seal) लगानी चाहिए। इस मकरजाल की आड़ में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी भी हो रही है, जिससे ईमानदार उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ती है।
मानसून सिर पर, पर अधिकारी बेखबर
कुछ ही दिनों में मानसून की दस्तक होने वाली है। बारिश के मौसम में इन जर्जर और उलझे हुए तारों के कारण पोल में करंट उतरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जिससे अक्सर लोगों की जान चली जाती है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कायमगंज डिवीजन के अधिकारी सिर्फ अपने दफ्तरों तक सीमित हैं और नगर की इन गंभीर समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
कायमगंज नगर वासियों का बड़ा सवाल:
जब एक जानवर की जान को दूसरे जानवरों के चंगुल से इंसानों ने मिलकर बचा लिया, तो क्या बिजली विभाग के आला अधिकारी अपनी जिम्मेदारी समझेंगे? क्या विद्युत पद पर बैठे ये ‘इंसान’ नगर के इंसानों की जान बचाने के लिए मानसून से पहले कोई ठोस कदम उठाएंगे, या फिर विभाग किसी बड़ी अनहोनी के होने का इंतजार कर रहा है?

