हज़रत बाबा जूही शाह का 68वां सालाना उर्स: रूहानी तकरीर और नातिया मुशायरे से महकी महफिल, दी गई सूफी संतों की शिक्षा |

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Manoj Jauhri
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित...
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रिपोर्ट सुधीर सिंह |

कायमगंज / फर्रुखाबाद |

नगर स्थित मुर्शिदी व मौलाई सरकार हज़रत बाबा जूही शाह के पवित्र आस्ताने पर आयोजित 68वें सालाना उर्स के दूसरे दिन धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों की धूम रही। इस अवसर पर नातिया मुशायरा और विशेष तकरीर (धार्मिक व्याख्यान) का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दराज से आए उलेमा, सूफी संतों और भारी संख्या में अकीदतमंदों (श्रद्धालुओं) ने शिरकत की। देर रात तक चले इस आयोजन में इबादत, इल्म, सूफी परंपरा और इंसानियत का संदेश गूंजता रहा।

इंसानियत की खिदमत ही सबसे बड़ी इबादत: अल्लामा मौलाना आले रसूल

बाद नमाज-ए-ईशा मीलाद शरीफ के आयोजन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। जौनपुर की बड़ी खानकाह से मुख्य वक्ता के रूप में तशरीफ लाए पीर-ए-तरीकत एवं सज्जादानशीन अल्लामा मौलाना आले रसूल सैयद नौशाद अली साहब ने सूफी संतों की शिक्षाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा-

सूफी संतों ने हमेशा मोहब्बत, भाईचारे, इंसानियत और सेवा का संदेश दिया है। औलिया अल्लाह ने जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर इंसानियत की खिदमत को सबसे बड़ी इबादत माना। आज की नई पीढ़ी को सूफी संतों की इन शिक्षाओं को आत्मसात करने की जरूरत है ताकि समाज में प्रेम व सौहार्द का वातावरण बना रहे।

त्याग और मानव कल्याण का प्रतीक था बाबा जूही शाह का जीवन

कार्यक्रम में मौजूद मुफ्ती नूरुद्दीन मौलाना यासिर कादरी ने हज़रत बाबा जूही शाह की करामातों और उनके जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बाबा जूही शाह स्वयं भूखे रहकर जरूरतमंदों और गरीबों को भोजन कराना पसंद करते थे। गरीबों की मदद करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था।

वहीं, मौलाना इमामुद्दीन ने अपने वक्तव्य में कहा कि बाबा जूही शाह की पूरी जिंदगी लोगों को सही राह दिखाने और मानवता की सेवा में समर्पित रही। उनके बताए मार्ग पर चलकर ही समाज को बेहतर दिशा दी जा सकती है।

नातिया मुशायरे ने घोला रूहानी रंग

उर्स के मौके पर आयोजित नातिया मुशायरे में शायरों और नातख्वानों ने नबी-ए-करीम की शान में बेहतरीन नातें और सूफियाना कलाम पेश किए, जिसने पूरी महफिल को रूहानी रंग में रंग दिया। कार्यक्रम का कुशल और प्रभावशाली संचालन हाफिज कारी गुलफराज साहब ने अपनी बेहतरीन निजामत से किया।

उर्स के सज्जादानशीन पीर-ए-तरीकत हज़रत मुशीर अहमद कादरी ने सभी मेहमानों, उलेमा और जायरीन का स्वागत करते हुए बाबा जूही शाह की परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

दरगाह पर उमड़ा जनसैलाब, देश में अमन-चैन की मांगी दुआ

उर्स के दौरान पूरे आस्ताने का माहौल आध्यात्मिक रंग में सराबोर नजर आया। अकीदतमंदों ने दरगाह शरीफ पर पहुंचकर मन्नत की चादरें पोशी कीं और मुल्क में अमन-चैन, तरक्की व आपसी भाईचारे के लिए दुआएं मांगीं।

ये गणमान्य लोग रहे उपस्थित: इस रूहानी महफिल में जमीर अहमद, धनेश गौड़, सनी बॉथम, मौलाना गुलाब हसन, हाफिज रिफत, तमहीद अहमद, तौहीद अहमद, मुन्नालाल, अमरेश गंगवार, मुकीम जूही, अमीर जूही, नोमान जूही, मोमिन जूही, जुबैर, सलमान, बिलाल सिद्दीकी, लाल मियां, सुहेल खान, फरजान अहमद, सैयद रशीद अली, बहार मियां शायर, हाफिज आजम, हाफिज कुद्दूस, मसूद खान सहित भारी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

आयोजकों के अनुसार, उर्स के आगामी दिनों में भी विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहेगा।

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Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय समाचार सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
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