जान दे देंगे, जमीन नहीं देंगे – औद्योगिक गलियारे के खिलाफ किसानों ने फूंका बिगुल, 14 जून को अगली बड़ी सभा |

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फर्रुखाबाद।

जनपद में प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे के लिए करीब 4500 हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण के खिलाफ किसानों का विरोध अब खुलकर सामने आने लगा है। मंगलवार को अमिलैया आसानंद स्थित बाग में एक दर्जन से अधिक गांवों के किसानों की बड़ी सभा आयोजित की गई, जिसमें किसानों ने एक स्वर में कहा कि वे अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे। सभा के दौरान किसानों ने “जान दे देंगे, जमीन नहीं देंगे” जैसे नारों के साथ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया।

सभा को संबोधित करते हुए किसान आंदोलन के प्रदेश अध्यक्ष अजय अनमोल ने कहा कि सरकार मनमाने तरीके से किसानों की उपजाऊ जमीन अधिग्रहित करना चाहती है, जिसे किसी भी हालत में सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश में पहले से ही लाखों एकड़ अधिग्रहित जमीन खाली पड़ी है, जहां आज तक उद्योग स्थापित नहीं हो सके हैं। ऐसे में फर्रुखाबाद की उपजाऊ भूमि को अधिग्रहित करना किसानों और कृषि व्यवस्था दोनों के साथ अन्याय है।

उन्होंने कहा कि अब किसान जागरूक हो चुके हैं और 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून सहित अपने अधिकारों को अच्छी तरह समझते हैं। यदि सरकार ने जबरन भूमि अधिग्रहण का प्रयास किया तो बड़ा जनांदोलन खड़ा किया जाएगा।

प्रदेश प्रभारी अशोक कटियार ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में भी अन्य राज्यों की तरह किसानों और आम जनता को राहत दी जानी चाहिए। उन्होंने 300 यूनिट मुफ्त बिजली, महिलाओं को प्रतिमाह 3000 रुपये सहायता राशि तथा बेरोजगार युवाओं को 4000 रुपये मासिक भत्ता देने की मांग उठाई। साथ ही इन मांगों को लेकर जन सत्याग्रह आंदोलन शुरू करने की घोषणा भी की।

ग्राम सुधार समिति के अध्यक्ष आकाश कटियार ने कहा कि किसानों के शोषण और अन्याय के खिलाफ अब गांव-गांव में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

सभा समाप्त होने के बाद किसानों ने नारेबाजी करते हुए जन चेतना यात्रा निकाली, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने ऐलान किया कि अगली किसान सभा 14 जून को अमिलैया आसानंद में आयोजित की जाएगी, जिसमें आंदोलन की आगे की रणनीति तय होगी।

इस मौके पर राजीव यादव लालू, राजवीर कठेरिया, प्रधान प्रमोद गंगवार, मदारी गंगवार, मृदुल गंगवार, कृष्णपाल, योगेंद्र सिंह, नवीन चंद्र, डॉ. जनार्दन गंगवार, अवनींद्र देवेश चतुर्वेदी, रामनरेश, विष्णु चंद्र, आरएस गंगवार, अंशुल गंगवार, रामौतार यादव, वीर सिंह यादव, भोजराम यादव, महेंद्र सिंह गंगवार समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

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