वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच संयम की अपील सामान्य वैश्विक प्रवृत्ति: कई देशों ने लागू किए सख्त ऊर्जा संरक्षण उपाय

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वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच संयम की अपील सामान्य वैश्विक प्रवृत्ति: कई देशों ने लागू किए सख्त ऊर्जा संरक्षण उपाय

वैश्विक ऊर्जा संकट और तेल आपूर्ति पर बढ़ते दबाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नागरिकों से ऊर्जा बचाने और अनावश्यक आवागमन कम करने की अपील कोई असामान्य या बढ़ा-चढ़ाकर किया गया कदम नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर में अपनाई जा रही व्यापक रणनीति का हिस्सा है। वर्ष 2026 के ऊर्जा संकट से निपटने के लिए अनेक देशों ने ऊर्जा संरक्षण को लेकर कठोर कदम उठाए हैं, जिनमें ईंधन राशनिंग, यात्रा प्रतिबंध, घर से काम करने की अनिवार्यता, बाजारों के समय में कटौती और सार्वजनिक अभियानों के माध्यम से बिजली एवं ईंधन की खपत घटाने जैसे उपाय शामिल हैं।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ट्रैकर के अनुसार लगभग 40 देशों और यूरोपीय आयोग ने आपातकालीन ऊर्जा संरक्षण उपाय लागू किए हैं। इनमें से 18 देशों ने ईंधन की खपत और आवागमन कम करने के लिए विशेष रणनीतियां अपनाई हैं, जबकि 13 देशों ने वर्क-फ्रॉम-होम और रिमोट वर्क को बढ़ावा दिया है। 35 से अधिक देशों ने व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों से ऊर्जा बचाने की अपील की है।

ऊर्जा संकट से निपटने के लिए पाकिस्तान ने चार दिवसीय कार्य सप्ताह और 50 प्रतिशत दूरस्थ कार्य व्यवस्था लागू की है, जबकि श्रीलंका ने बुधवार को कार्यालय बंद रखने का निर्णय लिया। इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, फिलीपींस और वियतनाम सहित कई देशों ने सरकारी और निजी क्षेत्रों में लचीली कार्य प्रणाली को बढ़ावा दिया है।

बिजली बचाने के उद्देश्य से अनेक देशों ने एयर कंडीशनिंग के तापमान की सीमा निर्धारित की है। बांग्लादेश और सिंगापुर में 25 डिग्री सेल्सियस, मलेशिया में 24 डिग्री तथा श्रीलंका और थाईलैंड में 26 डिग्री तापमान तय किया गया है। जॉर्डन ने सार्वजनिक कार्यालयों में एयर कंडीशनर के उपयोग पर प्रतिबंध तक लगा दिया है।

सरकारी यात्रा और ईंधन उपयोग पर भी कई देशों ने कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। पाकिस्तान ने सरकारी विदेश यात्राओं पर रोक लगाई है, जबकि कोरिया ने सार्वजनिक क्षेत्र में ऑड-ईवन नियम लागू किया है। श्रीलंका में क्यूआर कोड आधारित ईंधन राशनिंग व्यवस्था लागू की गई है और बांग्लादेश ने ईंधन की सीमा तय की है। पाकिस्तान ने मुफ्त सार्वजनिक परिवहन और गति सीमा लागू करने जैसे कदम उठाए हैं।

कुछ देशों ने स्कूलों और विश्वविद्यालयों के संचालन में भी बदलाव किए हैं। बांग्लादेश ने विश्वविद्यालय बंद किए, पाकिस्तान ने ऑनलाइन शिक्षा लागू की और लाओ पीडीआर ने कार्यदिवस घटाकर तीन दिन कर दिए।

ऊर्जा संरक्षण के लिए सार्वजनिक अभियानों के तहत ऑस्ट्रेलिया ने “हर छोटा कदम सहायक है” अभियान चलाया, जबकि सिंगापुर ने “आइए एक साथ ऊर्जा बचाएं” अभियान के माध्यम से कम बिजली खपत वाले उपकरणों के उपयोग को प्रोत्साहित किया। नीदरलैंड, स्पेन और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों ने सौर ऊर्जा, हीट पंप और ऊर्जा दक्ष उपकरणों के उपयोग के लिए कर राहत और अनुदान योजनाएं शुरू की हैं।

कई देशों ने ऊर्जा आपातकाल तक घोषित किया है। मेडागास्कर ने 15 दिनों का राष्ट्रव्यापी ऊर्जा आपातकाल लागू किया, जबकि मार्शल द्वीप समूह और तुवालु ने भी आपातकालीन कदम उठाए हैं। मालदीव और नेपाल में एलपीजी सिलेंडर आधे भरने की व्यवस्था लागू की गई है तथा मिस्र और श्रीलंका में बिलबोर्ड लाइटिंग बंद कर दी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा संकट के दौर में ऊर्जा बचत, सीमित आवागमन और दक्ष संसाधन उपयोग को लेकर सरकारों की अपीलें अब वैश्विक आवश्यकता बन चुकी हैं। ऐसे में भारत में प्रधानमंत्री मोदी की ओर से संयम और ऊर्जा संरक्षण की अपील भी इसी अंतरराष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा मानी जा रही है।

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