योगी सरकार ने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के नियमों में किया बड़ा बदलाव

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और व्यवस्थित बनाने के लिए बड़ा बदलाव कर दिया है। सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में ‘जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026’ को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई।

यह नई नियमावली ‘जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969’ के प्रावधानों के अंतर्गत लागू की जा रही है। नए नियमों के तहत डिजिटल माध्यम से प्रमाण पत्र प्राप्त करने की व्यवस्था को आसान बनाने के साथ-साथ, समय सीमा के बाद पंजीकरण कराने पर लगने वाले विलंब शुल्क (लेट फीस) और सक्षम अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र का पूरा स्लैब निर्धारित कर दिया गया है।

नई नियमावली के अनुसार, यदि किसी बच्चे के जन्म या किसी व्यक्ति की मृत्यु की घटना घटित होने के 21 दिन के भीतर इसकी सूचना रजिस्ट्रार को दी जाती है, तो प्रमाण पत्र पूरी तरह से निःशुल्क (फ्री) जारी किया जाएगा। इसके अलावा, अब आवेदक को रजिस्ट्रार से इलेक्ट्रॉनिक रूप (डिजिटल माध्यम) से या अन्य निर्धारित रूपों में जन्म अथवा मृत्यु का प्रमाण पत्र सीधे प्राप्त करने की आधुनिक सुविधा मिलेगी। घटना की सूचना अधिसूचक द्वारा घटना होने के 30 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार को दी जानी आवश्यक है।

यदि कोई व्यक्ति निर्धारित 21 दिनों की समय सीमा के भीतर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण नहीं करा पाता है, तो उसे अवधि के अनुसार निम्नलिखित विलंब शुल्क और प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।

21 दिन के बाद लेकिन 30 दिन के भीतर: पंजीकरण सीधे रजिस्ट्रार द्वारा किया जाएगा, जिसके लिए ₹20 का विलंब शुल्क देना होगा।

30 दिन के बाद लेकिन 1 वर्ष के भीतर: इसके लिए जिला रजिस्ट्रार अथवा अपर जिला रजिस्ट्रार (नगरीय/ग्रामीण) के आदेश की आवश्यकता होगी और रजिस्ट्रार द्वारा ₹50 विलंब शुल्क लेकर इसे दर्ज किया जाएगा।

1 वर्ष की अवधि बीत जाने के बाद: एक साल के बाद पंजीकरण कराने के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप जिला मजिस्ट्रेट (SDM) या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होगी। इसके लिए ₹100 विलंब शुल्क निर्धारित किया गया है।

बिना नाम के पंजीकरण पर नियम: यदि किसी बालक का जन्म बिना नाम के पंजीकृत किया गया है, तो माता-पिता या अभिभावक को जन्म के दिनांक से 12 महीने के भीतर रजिस्ट्रार को नाम की लिखित या मौखिक सूचना देनी होगी। यदि यह सूचना 12 महीने के बाद लेकिन 15 वर्ष की अवधि के भीतर दी जाती है, तो निर्धारित विलंब शुल्क के साथ नाम दर्ज किया जा सकेगा।

सर्च और कॉपी फीस: डिजिटल रिकॉर्ड की खोज और अतिरिक्त प्रतियों के लिए भी शुल्क तय किया गया है। प्रथम वर्ष में किसी एकल प्रविष्टि (Single Entry) की तलाश के लिए ₹20, प्रत्येक अतिरिक्त वर्ष की तलाश के लिए ₹20, प्रमाण पत्र देने के लिए ₹50 और ‘अनुपलब्धता प्रमाण पत्र’ (Non-Availability Certificate) के लिए ₹20 का शुल्क लगेगा।

नई नियमावली में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि जन्म रजिस्टर, मृत्यु रजिस्टर और मृत-जन्म (Still-Birth) रजिस्टर स्थायी महत्व के कानूनी और सामाजिक अभिलेख होंगे। इन्हें कभी भी नष्ट नहीं किया जाएगा और इन्हें सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति को नियमों के क्रियान्वयन या किसी स्तर पर कठिनाई आती है, तो वह नियमावली के प्रावधानों के तहत उच्च स्तर पर शिकायत संबंधी अपील भी दर्ज करा सकता है।

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