अमरोहा में बेलगाम हुआ बुखार: 1 महीने में 10 की मौत, अस्पतालों में 7000 पार पहुंची OPD
जनरल फोर्स ब्यूरो/अमरोहा
अमरोहा। बरसात के मौसम में बुखार बेलगाम होता जा रहा है। जिससे सरकारी अस्पतालों में भी रोजाना मरीजों की ओपीडी भी करीब 7000 के पार पहुंच गई है। इनमें से 60 प्रतिशत बुखार के शामिल हैं। हालात यह है कि हर घर में एक-दो मरीज बुखार से पीड़ित है।
लापरवाही के चलते बुखार धीरे-धीरे दिमागी बुखार में तब्दील हो हो रहा है और इलाज के कई दिन बाद भी मरीजों को राहत नहीं मिल रही है। जिससे एक माह के अंदर करीब दस व्यक्तियों की बुखार से मौत हो चुकी है।
प्रदेश में स्वाइन फ्लू की आहट से स्वास्थ्य विभाग सहमा हुआ है और इससे निपटने के लिए तैयारियां शुरू कर दी है। सभी सरकारी अस्पतालों में खांसी-जुकाम और बुखार के मरीजों की जांच के निर्देश दिए हैं। कभी तेज धूप, कभी बारिश व उमसभरे मौसम में व्यक्तियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो रही है।
जिससे व्यक्ति वायरल फीवर की चपेट में आ रहे हैं। इसमें बुखार आने पर सिर में दर्द, शरीर के जोड़ों में दर्द, आंखों में दर्द की शिकायत है। जिसमें लापरवाही बरतने पर यह बुखार धीरे-धीरे दिमागी बुखार में तब्दील हो रहा है और इलाज के बावजूद भी राहत नहीं मिल पा रही है।
सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो सरकारी अस्पतालों में रोजाना मरीजों की ओपीडी 6550 से बढ़कर 7000 से पार पहुंच गई है। इनमें से जिला अस्पताल में रोजाना करीब 2200 मरीजों तक ओपीडी हो रही है। इन मरीजों में 60 प्रतिशत मरीज बुखार के शामिल हैं।
जिससे वार्ड मरीजों से फुल चल रहे हैं। डिडौली क्षेत्र के गांव टिकिया फत्तेहपुर में मासूम युसूफ, मुजाहिदपुर में इमरान, बागड़पुर में दिनेश कुमार, दानिशमंदान में राजवती, हसनपुर क्षेत्र के मंगरौला गांव में कैंटीन संचालक, ढक्का गांव में रामवती समेत दस मौत हो चुकी हैं।
सीएमओ डाॅ. रमाकांत सागर ने बताया कि जिला अस्पताल समेत समस्त सीएचसी-पीएचसी में रोजाना करीब 7000 मरीजों की ओपीडी हो रही है। इसमें 60 प्रतिशत मरीज बुखार के शामिल हैं।
बुखार को हल्के में न ले मरीज, कराएं जांच
सीएमओ डाॅ. रमाकांत सागर ने स्वास्थ्य विभाग ने सभी सीएचसी-पीएचसी को अलर्ट पर रखा है। गांव-गांव में फागिंग और एंटी लार्वा छिड़काव कराया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि बुखार को हल्के में न लें।बुखार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत सरकारी अस्पताल लेकर मरीज को पहुंचे और जांच कराएं। बरसात में जलभराव के कारण मच्छर पनप रहे हैं। लोग बिना डाक्टर की सलाह के खुद से दवा ले रहे हैं और झोलाछापों से इलाज करा रहे हैं, जिससे बुखार बिगड़कर दिमागी बुखार बन जाता है।
अपने घरों के आसपास पानी एकत्र न होने दें।
घरों की नियमित सफाई कर एंटीलार्वा छिड़काव करें।
रात को साते समय खिड़की दरवाजे बंद कर ले और मच्छरदानी का प्रयोग करें।
बासी खाने से परहेज करें। तली-भुनी या बाजार की खुली चीजें न खाएं।

