वाराणसी लोकसभा सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हारने की हैट्रिक बनाने वाले कांग्रेस के योद्धा अजय राय ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमाने का फैसला लिया है. साथ ही आगामी चुनाव में सीट शेयरिंग पर समाजवादी पार्टी के सामने नहीं झुकने की बात कही।
कांग्रेस के प्रदेध अध्यक्ष अजय राय ने गुरुवार को एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में डंके की चोट पर ऐलान किया कि वह विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. उन्होंने पूरे उत्साह के साथ कहा- ‘अरे बनारस हमारा घर है. हम बनारस को कैसे भूल सकते हैं। काशी हमारा घर है तो हम डंके की चोट पर चुनाव लड़ेंगे. हम उसी पिंडरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे जो मेरा घर भी है.’ यहां बता दें कि पिंडरा विधानसभा सीट का पहले कोलअसला नाम था. 2012 से इसे पिंडरा नाम से जाना जाता है।
- 1996 विधानसभा चुनाव (कोलअसला): अजय राय ने बीजेपी के टिकट पर अजय राय ने CPI के नौ बार के विधायक उदल को हराया. इसके साथ ही वामपंथ के गढ़ में बीजेपी का परचम लहराया।
- 2002 विधानसभा चुनाव (कोलअसला): अजय राय ने बीजेपी के ही टिकट पर बीएसपी के अवधेश सिंह को हराया।
- 2007 विधानसभा चुनाव (कोलअसला): अजय राय ने बीजेपी के ही टिकट पर बीएसपी के अवधेश सिंह को हराया।
- 2009 विधानसभा उप-चुनाव (कोलअसला): निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अजय राय ने बीएसपी के अवधेश सिंह को हराया. 2009 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी से टिकट नहीं मिलने के बाद अजय राय ने पार्टी छोड़ दी थी।
- 2012 विधानसभा चुनाव (पिंडरा): अजय राय ने कांग्रेस के टिकट पर बीएसपी के जयप्रकाश को हराया।
- 2017 और 2022 (पिंडरा): लगातार दो चुनावों में बीजेपी के डॉ. अवधेश सिंह से अजय राय हार गए।
बातचीत के दौरान अजय रॉय ने बताया कि उन्होंने बीजेपी क्यों छोड़ी. कहा कि भारतीय जनता पार्टी जब तक अटल बिहारी वाजपेयी की भाजपा थी तब तक इस पार्टी में दम था. कार्यकर्ताओं का विश्वास था. जिस दिन अटल बिहारी वाजपेयी बिस्तर पर चले गए जिस दिन गुजरात की कंपनी आ गई. गुजरात की कंपनी की सरकार चलने लगी. उस दिन कार्यकर्ताओं का महत्व खत्म हो गया. कॉरपोरेट की तरह भारतीय जनता पार्टी चल रही है। अब कार्यकर्ता वहां पर पूरी तरीके से दरी बिछाने वाला, चादर बिछाने वाला रह गया है. अब कार्यकर्ता बाहर खड़ा रहता है. कार्यकर्ताओं का महत्व खत्म हो गया. जब कार्यकर्ताओं का महत्व खत्म हो गया तो अजय राय ने भी सोचा वहां क्या ही जरूरत है. आज मेरे साथ कार्यकर्ता खड़े हैं. कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा रहता हूं, लड़ता हूं, संघर्ष करता हूं. जब कार्यकर्ताओं को भाजपा भूल गई तो हम भी भाजपा को भूल गए. छोड़ दिया हमने त्याग दिया।
2014 के लोकसभा चुनाव में जब नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से चुनाव लड़ने का फैसला किया तब कांग्रेस ने अजय राय को उनके सामने उतारा. उसके बाद से लगातार तीनों बार अजय राय ही पीएम नरेंद्र मोदी के सामने ताल ठोकते नजर आए. हालांकि वह 2024 के लोकसभा चुनाव को छोड़ दें तो हर बार पीएम मोदी के सामने कहीं नहीं टिकते दिखे. इस तरह अजय राय पीएम मोदी से हार की हैट्रिक बना चुके हैं।
- 2014 लोकसभा चुनाव: नरेंद्र मोदी को 5,81,022 वोट मिले तो कांग्रेस के अजय राय 75,614 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे. दूसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल रहे थे।
- 2019 लोकसभा चुनाव: नरेंद्र मोदी ने पिछली बार से ज्यादा 6,74,664 वोट हासिल किए वहीं अजय राय 1,52,548 वोट ही पा पाए।
- 2024 लोकसभा चुनाव: पीएम मोदी को 6,12,970 वोट मिले. वहीं कांग्रेस के अजय राय को 4,60,457 वोट मिले. हार का अंतर 1,52,513 वोट रहा।
आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी के सामने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय झुकने को तैयार नहीं हैं. अजय राय ने कहा कि कांग्रेस किसी पार्टी के भरोसे नहीं, यूपी की जनता के भरोसे है. 2024 लोकसभा में सपा को 37 और कांग्रेस को 6 सीटें गठबंधन के कारण मिलीं. अजय राय का दावा है कि 2027 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपना अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करेगी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की जमीनी ताकत लगातार बढ़ रही है और पार्टी पूरी ताकत से यूपी में सरकार बनाने की तैयारी कर रही है. सपा नेताओं से सीटों या विवाद को लेकर टकराव की बात को उन्होंने खारिज किया।
कहा कि 2027 के सीट बंटवारे पर फैसला कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा।
