बरेली में लेखिका संघ की कवि गोष्ठी आयोजित: काव्य धारा में बहे श्रोता
बरेली 24 अक्टूबर (अजय किशोर) लेखिका संघ बरेली के तत्वावधान में गुरुवार को ग्रीनपार्क कॉलोनी में एक गरिमामयी कवि गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था की संरक्षक निर्मला सिंह ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में हिमांशु श्रोत्रिय ‘निष्पक्ष’ और विशिष्ट अतिथि के रूप में मिथलेश राकेश उपस्थित रहे। मंच का कुशल एवं काव्यमय संचालन प्रसिद्ध गीतकार कमल सक्सेना ने किया। गोष्ठी का औपचारिक शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और अविनाश अग्रवाल की मधुर माँ शारदे की वंदना के साथ हुआ।
काव्य संध्या का आगाज़ करते हुए अध्यक्ष निर्मला सिंह ने जीवन के दर्शन को पिरोती पंक्तियाँ पढ़ीं कि हर आने वाला दिन ज़िंदगी को एक नया लिबास ओढ़ाता है और बीते दिन को वक़्त की अरगनी पर टांग देता है। इसके बाद मुख्य अतिथि हिमांशु श्रोत्रिय ‘निष्पक्ष’ ने अपनी ग़ज़ल “ग़ज़ाला पर ग़ज़ल कहने की कोशिश है मुहब्बत में…” और “सितारों से भरे इस आस्मां को ओढ़नी कर दूँ…” सुनाकर महफ़िल में मौजूद सभी श्रोताओं की ज़ोरदार तालियाँ और प्रशंसा बटोरी।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे कमल सक्सेना ने श्रृंगार के मुक्तक और ग़ज़ल “तन्हाइयों की रात जब आधी गुज़र गयी…” से समां बाँध दिया। वहीं विशिष्ट अतिथि मिथलेश राकेश ने अपने संजीदा अशआर “सफर जितना करो घर लौटकर आना जरूरी है, बहुत ऊँचा उठो लेकिन ज़मीं पाना जरूरी है…” प्रस्तुत कर जीवन के गहरे मूल्यों का संदेश दिया। आयोजक व संस्था अध्यक्ष अल्पना नारायण ने अपनी भावपूर्ण ग़ज़ल “बुझी कब प्यास इस दिल की नदी आई स्वयं लब तक…” सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया।
काव्यधारा को आगे बढ़ाते हुए सीमा सक्सेना ‘असीम’ ने महफ़िल की सलामती और मोहब्बत की दुआ माँगी, तो मीरा प्रियदर्शनी ने मिट्टी के दीपक के माध्यम से प्रेम और सहयोग का संदेश दिया। मोना प्रधान ने अपनी पंक्तियों “मनुआ तो चहुं दिशा उड़े, फिर भी रहे अधीर…” से चंचल मन का सुंदर वर्णन किया, जबकि अविनाश अग्रवाल, मीना अग्रवाल और नीतू गोयल ने प्रेम, समर्पण और जीवन की अनुभूतियों पर आधारित अपनी रचनाओं से गोष्ठी को यादगार बना दिया।
विभिन्न रंग और भावों से सजी इस कवि गोष्ठी के अंत में आयोजक अल्पना नारायण ने कार्यक्रम में पधारे सभी विद्वान कवियों, अतिथियों और श्रोताओं का हृदय से आभार व्यक्त किया। साहित्यिक गरिमा, प्रेम और काव्य रस से सराबोर यह शाम बरेली के साहित्य प्रेमियों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ गई।
