वकीलों ने कांवड़ यात्रा में रोक पर आपत्ति जताई: गरीब दुकानदारों के उत्पीड़न का आरोप
जनरल फोर्स ब्यूरो/अमरोहा
अमरोहा के अधिवक्ताओं ने कांवड़ यात्रा के दौरान मुख्य मार्गों पर खाने-पीने की वस्तुओं की बिक्री पर लगाई जा रही कथित रोक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। बुधवार दोपहर कलेक्ट्रेट पहुंचकर अधिवक्ताओं ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
अधिवक्ताओं का आरोप है कि कांवड़ यात्रा आस्था का प्रतीक है, लेकिन इसकी आड़ में प्रशासन और कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा छोटे और गरीब दुकानदारों का उत्पीड़न किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यात्रा मार्गों पर खाने-पीने का सामान बेचने पर रोक लगाने से इन दुकानदारों के परिवारों पर आर्थिक संकट आ गया है।
अधिवक्ता नासिर फारुख ने ज्ञापन में लिखा है कि कांवड़ यात्रा समाप्त होने तक प्रशासन द्वारा इन दुकानदारों को परेशान न किया जाए। उन्होंने इसे उनके मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन बताया।
ज्ञापन में सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली के एक आदेश का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया था कि किसी भी धार्मिक आयोजन में दूसरे धर्म के लोगों को खाने-पीने पर रोक नहीं लगाई जा सकती, क्योंकि यह उनका मौलिक अधिकार है। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकारें इस दिशा-निर्देश का पालन नहीं कर रही हैं।
अधिवक्ताओं ने राज्यपाल से इस मामले का संज्ञान लेने और सभी जिलाधिकारियों को यह आदेश देने की मांग की है कि किसी भी दुकानदार का उत्पीड़न न किया जाए और खाने-पीने के सामान की बिक्री पर किसी प्रकार की रोक न लगाई जाए।
