कायमगंज/फर्रुखाबाद।
पितृपक्ष के पावन अवसर पर पूर्वजों की पुण्य स्मृति में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक ज्ञान एवं भक्ति का लाभ प्राप्त किया। नैमिषारण्य धाम से पधारे कथा व्यास श्री शिवानंद भाईश्री जी महाराज ने श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

कथा के दौरान महाराज श्री ने बताया कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य मार्गदर्शक है। भगवान की कथा का श्रवण मनुष्य के भीतर भक्ति का भाव जागृत करता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।

तृतीय दिवस की कथा में भगवान के प्रति समर्पण, सत्संग की महिमा तथा मानव जीवन में धर्म और सदाचार के महत्व को विशेष रूप से समझाया गया। कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य को सांसारिक मोह-माया में उलझने के बजाय अपने जीवन को प्रभु की भक्ति और सेवा के लिए समर्पित करना चाहिए।
कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भजनों और भक्तिमय वातावरण से पूरा पंडाल आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दिया। श्रद्धालुओं ने एकाग्रचित्त होकर कथा का श्रवण किया और भगवान के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
आयोजकों ने बताया कि पितृपक्ष में आयोजित यह दिव्य श्रीमद्भागवत कथा पूर्वजों की पुण्य स्मृति को समर्पित है। कथा के आगामी दिनों में भी श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया जाएगा।

