फर्रुखाबाद।
गंभीर कुपोषण से जूझ रहे मासूम बच्चों को नया जीवन देने में फर्रुखाबाद का डॉ. राम मनोहर लोहिया जिला चिकित्सालय लगातार नई मिसाल कायम कर रहा है। अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) ने अपनी उत्कृष्ट सेवाओं और बेहतर परिणामों के दम पर प्रदेश के टॉप-10 एनआरसी में जगह बना ली है। सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यहां भर्ती होने वाले 95 प्रतिशत बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं, जो केंद्र की प्रभावी कार्यप्रणाली और समर्पित टीम की मेहनत का प्रमाण है।
महज 10 शैय्याओं वाले इस पोषण पुनर्वास केंद्र में उपचार के लिए लगातार बच्चों की आमद बनी रहती है। जून माह में केंद्र में 162 बेड-डे ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई, जिससे स्पष्ट है कि लगभग पूरे महीने सभी बेड मरीजों से भरे रहे। इससे केंद्र पर लोगों का बढ़ता भरोसा भी दिखाई देता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय ने बताया कि गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) से पीड़ित बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है। एनआरसी में भर्ती प्रत्येक बच्चे को लगभग 14 दिनों तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाता है। इस दौरान बच्चों को आवश्यक दवाएं, पौष्टिक आहार, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और समुचित उपचार पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है।
उन्होंने बताया कि उपचार केवल बच्चे तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके साथ रहने वाली मां की भी पूरी देखभाल की जाती है। भर्ती अवधि के दौरान माताओं को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाता है और उन्हें प्रतिदिन 50 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है, ताकि वे बिना किसी आर्थिक चिंता के बच्चे की देखभाल कर सकें।
एनआरसी की विशेषता यह भी है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी बच्चों की निगरानी बंद नहीं होती। प्रत्येक बच्चे का 15-15 दिन के अंतराल पर चार बार फॉलोअप कराया जाता है। हर फॉलोअप पर परिवार को 140 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है, जिससे अभिभावक नियमित रूप से बच्चे को जांच के लिए लेकर आएं और उसका पोषण स्तर लगातार बेहतर होता रहे।
केंद्र का संचालन चिकित्सा अधिकारी डॉ. विवेक सक्सेना के नेतृत्व में किया जा रहा है। उनके साथ डायटीशियन संगीता शुक्ला, छह प्रशिक्षित स्टाफ नर्स और एक रसोइया पूरी लगन से बच्चों की देखभाल में जुटे हैं। टीम न सिर्फ बच्चों का उपचार करती है, बल्कि माताओं को संतुलित आहार, स्तनपान, पूरक पोषण और शिशु देखभाल के बारे में भी विस्तार से जागरूक करती है, ताकि भविष्य में बच्चे दोबारा कुपोषण का शिकार न हों।
स्वास्थ्य विभाग के इस अभियान को जिला प्रशासन का भी पूरा सहयोग मिल रहा है। समय-समय पर जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी स्वयं एनआरसी पहुंचकर भर्ती बच्चों और उनकी माताओं का उत्साहवर्धन करते हैं। इस दौरान बच्चों को फल, वस्त्र और बेबी जॉनसन किट भी भेंट की जाती है। इससे परिवारों में बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है तथा उपचार के प्रति सकारात्मक माहौल बन रहा है।
सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय ने जनपदवासियों से अपील की कि यदि किसी भी बच्चे में गंभीर कुपोषण के लक्षण दिखाई दें तो उसे छिपाने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या पोषण पुनर्वास केंद्र में लाकर उपचार कराएं। उनका कहना है कि समय पर इलाज, संतुलित पोषण और नियमित फॉलोअप से कुपोषण जैसी गंभीर समस्या को पूरी तरह हराया जा सकता है।
फर्रुखाबाद का यह मॉडल आज उन जिलों के लिए प्रेरणा बन रहा है, जहां अभी भी कुपोषण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। बेहतर चिकित्सा व्यवस्था, प्रशिक्षित टीम और प्रभावी फॉलोअप के कारण जिले का एनआरसी अब प्रदेश में अपनी अलग पहचान बना चुका है।
