मोहम्मदाबाद/फर्रुखाबाद।
मोहम्मदाबाद ब्लॉक के ग्राम सभा बराकेशव में चकबंदी प्रक्रिया और किसानों पर दर्ज मुकदमों के विरोध में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को 13वें दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर भारतीय किसान यूनियन टिकैत के जिला अध्यक्ष अजय कटियार के पहुंचने पर किसानों ने नारेबाजी करते हुए संगठन के समर्थन में आवाज बुलंद की। इस दौरान कोरीखेड़ा प्रकरण को लेकर किसान नेताओं ने थाना जहानगंज पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग उठाई।
जिलाध्यक्ष अजय कटियार ने आरोप लगाया कि थाना जहानगंज क्षेत्र के कोरीखेड़ा गांव में नौ माह पूर्व 10 वर्षीय बच्चे के अपहरण के बाद हत्या की घटना हुई थी। उनके मुताबिक घटना की जांच के लिए छह माह से एसआईटी भी गठित है, लेकिन परिवार को अभी तक घटना के कारणों और हत्यारों की गिरफ्तारी के संबंध में संतोषजनक जानकारी नहीं मिल सकी है।
अजय कटियार का आरोप है कि तीन सितंबर को मुख्यमंत्री के जनपद आगमन के दौरान पीड़ित परिवार अपनी समस्या मुख्यमंत्री तक पहुंचाना चाहता था। इसी दौरान थाना जहानगंज की प्रभारी पूनम अवस्थी द्वारा परिवार की महिलाओं के साथ मारपीट और अभद्रता किए जाने का आरोप लगाया गया। किसान नेता ने यह भी आरोप लगाया कि परिवार का मोबाइल फोन लेकर उसमें मौजूद साक्ष्य डिलीट किए गए और परिवार को अलग-अलग नंबरों से धमकियां दी जा रही हैं।
मामले में भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने पुलिस अधीक्षक से थाना प्रभारी जहानगंज को 72 घंटे के भीतर निलंबित करने और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उचित कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर ट्रैक्टरों के साथ कलेक्ट्रेट का घेराव किया जाएगा।

पुलिस ने जारी किया अपना पक्ष
वहीं, फतेहगढ़ पुलिस की ओर से जारी बयान में किसान नेताओं के आरोपों से अलग तस्वीर सामने रखी गई है। पुलिस के अनुसार 3 सितंबर 2026 को थाना जहानगंज क्षेत्र के कोरीखेड़ा गांव में दो पक्षों के बीच गाली-गलौज और मारपीट की सूचना मिली थी। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया जा रहा था।
पुलिस के मुताबिक इसी दौरान विपक्षी पक्ष द्वारा थाना जहानगंज में पूर्व में पंजीकृत अभियोग के मामले को लेकर पुलिस के साथ अभद्रता की गई। पुलिस का दावा है कि विपक्षी पक्ष पुलिस की मौजूदगी में ही आवेदिका से दोबारा झगड़ा करने लगा। स्थिति को नियंत्रित करने और मौके पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस द्वारा हल्का और न्यूनतम बल प्रयोग किया गया।
आरोप बनाम पुलिस का पक्ष बना चर्चा का विषय
इस पूरे प्रकरण में किसान यूनियन की ओर से महिलाओं के साथ मारपीट, मोबाइल छीनकर कथित साक्ष्य डिलीट करने और धमकी दिए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जबकि पुलिस के आधिकारिक बयान में घटना को दो पक्षों के बीच विवाद, पुलिस से अभद्रता और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए किए गए न्यूनतम बल प्रयोग के रूप में बताया गया है।
दोनों पक्षों के बयानों में सामने आ रहा यह अंतर अब जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे में घटना की निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि तीन सितंबर को कोरीखेड़ा में वास्तव में क्या परिस्थितियां बनीं और पुलिस कार्रवाई की आवश्यकता किन परिस्थितियों में पड़ी। फिलहाल किसान संगठन कार्रवाई की मांग पर अड़ा है, जबकि पुलिस ने अपने बयान के जरिए कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता दीप सिंह यादव ने की और संचालन जिला प्रवक्ता गोपी शाक्य ने किया। इस मौके पर जिला संरक्षक छविनाथ शाक्य, जिला उपाध्यक्ष कृष्ण गोपाल मिश्रा, जिला महासचिव अभय यादव, युवा जिलाध्यक्ष अनुज राजपूत, राजेश गंगवार, सुग्रीव पाल, बिजनेश यादव, अजीत सोमवंशी और रामनरेश यादव सहित बड़ी संख्या में किसान, महिलाएं और बच्चे मौजूद रहे।

