प्रशासनिक दावों की खुली पोल: सिनौली गांव में नाव न मिलने पर लोहे की कढ़ाई बनी नैया, वीडियो वायरल |

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Manoj Jauhri
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित...
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कायमगंज/फर्रुखाबाद।

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बाढ़ की मार झेल रहे ग्रामीण इलाकों में सरकारी व्यवस्थाओं के दावों की हकीकत सामने लाने वाला एक अजीबोगरीब वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कायमगंज क्षेत्र के सिनौली गांव में बाढ़ का पानी गलियों तक भर जाने के बाद एक ग्रामीण को बुजुर्ग महिला को इलाज के लिए बाहर निकालने के लिए नाव की जगह लोहे की बड़ी कढ़ाई का सहारा लेना पड़ा। ग्रामीण ने कढ़ाई को ही जुगाड़ की नाव बना दिया और उसमें बुजुर्ग महिला को बैठाकर बाढ़ के पानी के बीच गली से मुख्य सड़क तक पहुंचाया।

बताया गया कि गांव निवासी कमला देवी के हाथ में फैक्चर हो गया था और उन्हें चिकित्सक को दिखाने के लिए गांव से बाहर ले जाना जरूरी था। लेकिन बाढ़ के पानी ने गांव की गलियों को इस कदर घेर रखा था कि सामान्य तरीके से महिला को बाहर निकालना मुश्किल हो गया। गांव की संकरी गलियों में बड़ी नाव भी नहीं पहुंच सकती थी। ऐसे में परिजनों और ग्रामीणों के सामने महिला को सुरक्षित बाहर निकालने की चुनौती खड़ी हो गई।

आखिरकार एक ग्रामीण ने घर में इस्तेमाल होने वाली लोहे की बड़ी कढ़ाई को ही नाव का रूप दे दिया। महिला को सावधानी से कढ़ाई में बैठाया गया और ग्रामीण उसे बाढ़ के पानी के बीच धकेलते हुए गली से मुख्य मार्ग तक लेकर पहुंचा। इस दौरान किसी तरह महिला को पानी के बीच से बाहर निकाला गया, जिसके बाद उसे उपचार के लिए ले जाया गया।

कढ़ाई में बैठी बुजुर्ग महिला और उसे पानी के बीच से निकालते ग्रामीण का वीडियो किसी ने कैमरे में कैद कर लिया। देखते ही देखते वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद लोग बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत और बचाव की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाने लगे हैं।

कागजों में नाव, जमीन पर कढ़ाई!

ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के दौरान प्रभावित परिवारों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रशासन की ओर से नावें उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन कई स्थानों पर जरूरत के समय ग्रामीणों को खुद ही जुगाड़ के सहारे काम चलाना पड़ रहा है। सिनौली गांव की घटना ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जब किसी बीमार, बुजुर्ग या गर्भवती महिला को तत्काल बाहर निकालने की जरूरत पड़े और नाव उपलब्ध न हो तो हालात कितने भयावह हो सकते हैं, इसका अंदाजा इस वीडियो से लगाया जा सकता है। संकरी गलियों में नाव पहुंचना संभव नहीं होने के कारण स्थानीय स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत महसूस हो रही है।

बाढ़ के बीच जिंदगी का ‘जुगाड़’

सिनौली गांव की यह तस्वीर सिर्फ एक बुजुर्ग महिला को कढ़ाई में बैठाकर बाहर निकालने की घटना नहीं, बल्कि बाढ़ के बीच ग्रामीणों की मजबूरी और जुगाड़ की कहानी भी बयां कर रही है। जहां सामान्य दिनों में कढ़ाई रसोई में इस्तेमाल होती है, वहीं बाढ़ ने उसे ग्रामीणों के लिए अस्थायी नाव बना दिया।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ प्रभावित गांवों में पर्याप्त संख्या में नावें और बचाव संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि किसी मरीज, बुजुर्ग, महिला या बच्चे को इलाज अथवा सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए इस तरह के जोखिम भरे जुगाड़ का सहारा न लेना पड़े।

सिनौली गांव का वायरल वीडियो अब प्रशासनिक व्यवस्थाओं की हकीकत पर सवाल खड़ा कर रहा है—बाढ़ में जब नाव का इंतजार खत्म हुआ तो कढ़ाई ही ग्रामीणों की ‘नैया’ बन गई।

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Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय समाचार सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
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