फतेहगढ़।

गंगा-जमुनी तहज़ीब की जीवंत मिसाल मानी जाने वाली फतेहगढ़ स्थित ऐतिहासिक दरगाह हज़रत मखदूम शाह सैय्यद शहाबुद्दीन औलिया अलैहि रहमा में मंगलवार को बड़े ही अकीदत और धार्मिक उल्लास के साथ चार दिवसीय वार्षिक उर्स का शुभारंभ हुआ। उर्स के पहले दिन सुबह से ही दरगाह परिसर में जायरीनों की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण इबादत, दुआओं और रूहानी नूर से सराबोर हो गया।
सुबह 6 बजे कुरआनखानी का आयोजन किया गया, जिसके बाद अकीदतमंदों ने दरगाह पर फूल और चादर पेश कर मुल्क में अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी। दूर-दराज़ से आए जायरीनों ने दरगाह पर हाजिरी देकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। शाम को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बीच लंगर भी वितरित किया गया, जिसमें सभी धर्मों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
दरगाह के सज्जादा नशीन शाह मोहम्मद वसीम उर्फ मोहम्मद मियां ने बताया कि चिराग-ए-रोशनी के साथ उर्स का विधिवत आगाज़ हो चुका है। उन्होंने सभी अकीदतमंदों से अपील की कि वे उर्स में हाजिरी देकर दरगाह की रूहानी फिज़ाओं से फैज़ हासिल करें। उन्होंने बताया कि उर्स का आयोजन 28 से 31 जुलाई 2026 तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ संपन्न होगा।
उधर आयोजित तहफ्फुज़-ए-सुन्नत कॉन्फ्रेंस में जानशीन-ए-हुज़ूर मोहब्बत शाह, हज़रत पीरज़ादा शाह मुहम्मद वसीम उर्फ मोहम्मद मियां चिश्ती साबरी मुजद्दिद ने विशिष्ट अतिथियों का शील्ड भेंट कर सम्मान किया। कार्यक्रम में सूफी परंपरा, इंसानियत, अमन और भाईचारे का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर आसिफ़ इसरार साबरी, रफत हुसैन, मोबीन साबरी, आफताब साबरी, फ़ज़ल साबरी, राहुल, राजेश, शिवम सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
