कायमगंज/कंपिल/फर्रुखाबाद |

चार दशक से जमीन के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहे एक किसान का सब्र बुधवार को जवाब दे गया। वर्षों से तहसील और अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद भी समाधान न मिलने से आहत किसान आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर हो गया। किसान तहसील परिसर में लगे पीपल के ऊंचे पेड़ पर चढ़ गया और नीचे उतरने से इनकार कर दिया। घटना से तहसील परिसर में अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई और सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला तथा पुलिस मौके पर दौड़ पड़ी।
कंपिल थाना क्षेत्र के गांव सिवारा खास निवासी इंद्रपाल ने आरोप लगाया कि उनकी दादी रेवती के नाम करीब 7.5 बीघा जमीन थी। दादी के निधन के बाद गांव के ही एक व्यक्ति ने कथित रूप से अभिलेखों में हेराफेरी कर जमीन अपने नाम दर्ज करा ली। इंद्रपाल का कहना है कि इस जमीन को वापस पाने के लिए उनका परिवार पिछले 40 वर्षों से न्यायालयों और राजस्व विभाग के चक्कर काट रहा है, लेकिन आज तक न्याय नहीं मिल सका।
पीड़ित किसान ने बताया कि इस लड़ाई के दौरान उनके पिता लड़ैते ने पूरी जिंदगी न्याय की उम्मीद में गुजार दी। बाद में मुकदमे की पैरवी कर रहे उनके बड़े भाई वीरपाल का भी निधन हो गया। अब वह अकेले इस लड़ाई को लड़ रहे हैं। किसान का आरोप है कि विरोधी पक्ष अब उनके पिता के हिस्से की बची हुई जमीन पर भी कब्जा करने की धमकियां दे रहा है। लगातार मिल रही धमकियों और प्रशासनिक स्तर पर राहत न मिलने से वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गए और इसी के चलते उन्होंने तहसील परिसर में पेड़ पर चढ़कर अपनी जान देने की चेतावनी दे दी।
किसान के पेड़ पर चढ़ने की सूचना मिलते ही पूरे तहसील परिसर में हड़कंप मच गया। कर्मचारी और फरियादी मौके पर जुट गए। सूचना पर एसडीएम अभिषेक वर्मा, तहसीलदार हर्षित सिंह तथा कोतवाली प्रभारी मदन मोहन शुक्ला पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने काफी देर तक किसान से बातचीत की और निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने का भरोसा दिया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद किसान सुरक्षित पेड़ से नीचे उतर आया, जिसके बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली।
एसडीएम अभिषेक वर्मा ने बताया कि किसान ने पहले उनके समक्ष सीधे तौर पर शिकायत प्रस्तुत नहीं की थी। अब पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच कराई जाएगी और राजस्व अभिलेखों का परीक्षण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर राजस्व विभाग में वर्षों से लंबित भूमि विवादों और न्याय मिलने में हो रही देरी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों का निष्पक्ष निस्तारण हो जाए तो किसी भी फरियादी को इस तरह का कदम उठाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़े।
