कमालगंज/फर्रुखाबाद/
जनपद में बिजली विभाग की कथित लापरवाही एक बार फिर लोगों की जान पर भारी पड़ती दिखाई दी। कमालगंज थाना क्षेत्र में दोपहर एक दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। मकान की छत पर सूख रहे कपड़े उतारने गया एक मासूम पास से गुजर रही 33 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया। तेज धमाके के साथ करंट लगने से बच्चा गंभीर रूप से झुलस गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
मौत बनकर छत के ऊपर दौड़ी 33 हजार वोल्ट की लाइन! कपड़े उतारने गया मासूम जिंदा जला, जिम्मेदारों की लापरवाही पर उठे सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के खिमसेपुर गांव निवासी प्रदीप, जो पेशे से राजमिस्त्री हैं, परिवार सहित कमालगंज में किराये के मकान में रहते हैं। दोपहर लगभग तीन बजे उनका पुत्र सागर घर की छत पर सूख रहे कपड़े उतारने गया था। इसी दौरान मकान के बेहद नजदीक से गुजर रही 33 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से झुलस गया।
मासूम की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े। स्थानीय लोगों ने जान जोखिम में डालकर किसी तरह बच्चे को सुरक्षित नीचे उतारा। घटना की सूचना मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई और आनन-फानन में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कमालगंज ले जाया गया।
चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद बच्चे की हालत अत्यंत गंभीर देखते हुए उसे डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया। वहां भी डॉक्टरों ने हालत नाजुक होने के कारण बेहतर इलाज के लिए तत्काल हायर सेंटर भेज दिया। बताया जा रहा है कि करंट से बच्चे के पैर और कमर बुरी तरह झुलस गए हैं तथा उसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इस दर्दनाक हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि रिहायशी मकानों के बिल्कुल ऊपर और बेहद कम ऊंचाई पर गुजर रही हाईटेंशन लाइन लंबे समय से बड़े हादसे को दावत दे रही है, लेकिन संबंधित विभाग ने कभी इस ओर गंभीरता नहीं दिखाई। अब जब एक मासूम जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है, तब लोगों ने प्रशासन और बिजली विभाग से मांग की है कि पूरे क्षेत्र का तत्काल सर्वे कराकर आबादी के बीच से गुजर रही हाईटेंशन लाइनों को सुरक्षित दूरी पर शिफ्ट कराया जाए, ताकि भविष्य में कोई और परिवार इस तरह के दर्दनाक हादसे का शिकार न बने।
जनता का सवाल:
क्या इस हादसे के बाद बिजली विभाग और प्रशासन जिम्मेदारी तय करेगा, या फिर अगली बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जाएगा?
