फर्रुखाबाद/
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस को पूरी गंभीरता और प्रभावी ढंग से सफल बनाने के लिए जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार, फतेहगढ़ में आयोजित जनपद स्तरीय अंतर्विभागीय समन्वय समिति की बैठक में अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। बैठक के दौरान डीएम का सख्त तेवर देखने को मिला। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही, दवा की कमी, अनियमितता या मरीजों को सरकारी अस्पताल से निजी अस्पतालों में रेफर करने की शिकायत मिली तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
डीएम ने कहा कि अस्पतालों में दवा की कमी, मरीजों को प्राइवेट अस्पताल भेजा या फर्जी मेडिकल बिल पास किए तो होगी कड़ी कार्रवाई,
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाओं, मूलभूत सुविधाओं और व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि निरीक्षण के दौरान अनियमितताएं मिलीं तो संबंधित चिकित्सा अधीक्षक सीधे जिम्मेदार होंगे और उनके खिलाफ कार्रवाई तय होगी।
बैठक में उन्होंने कार्यरत एवं सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों में गड़बड़ी पर भी सख्त रुख अपनाया। डीएम ने स्पष्ट कहा कि यदि मेडिकल बिलों के भुगतान में अनियमितता या फर्जीवाड़ा पाया गया तो संबंधित लिपिक और हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी पर भी कार्रवाई होगी।
जिलाधिकारी ने सरकारी अस्पतालों से मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने की प्रवृत्ति पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी स्वास्थ्यकर्मी की संलिप्तता सामने आई तो उसे तत्काल निलंबित किया जाएगा।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस अभियान को लेकर डीएम ने निर्देश दिए कि लक्षित आयु वर्ग का कोई भी बच्चा कृमिनाशक दवा से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने आशा, एएनएम और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को निर्देश दिए कि बच्चों को केवल वैध अवधि वाली एल्बेंडाजोल दवा ही दी जाए। एक से दो वर्ष तक के बच्चों को दवा केवल लिक्विड फॉर्म में पिलाई जाए ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो।
उन्होंने शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग को संयुक्त रूप से अभियान चलाकर स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता फैलाने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और कुपोषण से बचाव के लिए यह अभियान बेहद महत्वपूर्ण है और इसमें सभी विभागों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनन्द उपाध्याय ने अभियान की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए बताया कि दवा वितरण, प्रशिक्षण, मॉप-अप दिवस और विभागीय समन्वय की सभी तैयारियां समय से पूरी की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि अभियान को सफल बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच लगातार समन्वय स्थापित किया जा रहा है। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
