कमालगंज /फर्रुखाबाद/
परिवार को जोड़ने वाले रिश्ते जब संपत्ति के विवाद में उलझ जाते हैं, तो सबसे बड़ा दर्द अपनों से ही मिलता है। कमालगंज थाना क्षेत्र के छीता कपूरपुर गांव में ऐसा ही एक मार्मिक मामला सामने आया है, जहां एक युवक अपनी पत्नी और दो मासूम बच्चों के साथ पिछले तीन दिनों से अपने ही पैतृक मकान के बाहर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है। युवक का आरोप है कि उसकी मां और दोनों भाइयों ने उसे घर में प्रवेश तक नहीं करने दिया, जिसके चलते पूरा परिवार सड़क किनारे रातें गुजारने को विवश है।
पीड़ित कलेक्टर, जो मूल रूप से दीवारापुर गांव का निवासी है, ने बताया कि पिता के निधन के बाद वह कुछ समय के लिए बाहर रह रहा था। बाद में जब वह अपनी पत्नी सुमन और दो छोटे बच्चों के साथ अपने पैतृक घर में रहने के लिए लौटा, तो उसकी मां तथा भाई कश्मीर और नीलेश ने उसे घर में घुसने से रोक दिया। उनका कहना है कि मकान पैतृक है और उसमें उसका भी बराबर का कानूनी अधिकार है, लेकिन इसके बावजूद उसे बेदखल करने की कोशिश की जा रही है।
पीड़ित का आरोप है कि परिजन उस पर दूसरे जनपद में शादी करने का आरोप लगाकर उसे संपत्ति से वंचित करना चाहते हैं। इसी वजह से उसे और उसके परिवार को घर से बाहर रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है। सबसे अधिक परेशानी उसकी पत्नी और दोनों छोटे बच्चों को उठानी पड़ रही है, जिन्हें तेज धूप और बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे दिन-रात गुजारने पड़ रहे हैं।
न्याय की उम्मीद में पीड़ित ने यूपी डायल-112 पर सूचना देकर पुलिस से मदद मांगी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से बातचीत की, लेकिन युवक को घर में प्रवेश नहीं मिल सका। तीन दिन बीत जाने के बाद भी परिवार घर के बाहर बैठा है और प्रशासन से न्याय की आस लगाए हुए है।
वहीं, दूसरे पक्ष का कहना है कि युवक ने दूसरे जनपद में शादी की है, इसलिए वे उसे घर में रखने के पक्ष में नहीं हैं। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद लगातार बना हुआ है।
मामले में कमालगंज थाना अध्यक्ष राम सहाय सिंह ने बताया कि दोनों पक्षों की शिकायत और तथ्यों की जांच की जा रही है। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मामला केवल संपत्ति विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि परिवार के बिखरते रिश्तों और मासूम बच्चों के भविष्य से भी जुड़ गया है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर इस पीड़ित परिवार को कब अपने ही घर की चौखट के भीतर रहने का अधिकार मिल पाएगा।
