एटा में खाद की कालाबाजारी पर प्रशासन का बड़ा प्रहार, 670 बोरी सरकारी यूरिया बरामद
*किसानों के हितों पर डाका डालने वालों के विरुद्ध दर्ज होगी कठोर कार्रवाई*
एटा । जनपद में किसानों के लिए सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाने वाली सरकारी यूरिया की कालाबाजारी के विरुद्ध जिला प्रशासन ने बड़ी एवं प्रभावी कार्रवाई करते हुए एक संगठित अवैध नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जिलाधिकारी अरविन्द सिंह के निर्देशन एवं सतत निगरानी में प्रशासनिक टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए जलेसर तहसील क्षेत्र में सरकारी यूरिया की अवैध ढुलाई एवं कालाबाजारी का मामला उजागर किया गया।
दिनांक 24 जून 2026 की रात्रि लगभग 11:50 बजे प्राप्त सूचना के आधार पर एसडीएम जलेसर पीयूष रावत एवं तहसीलदार संदीप सिंह ने पुलिस बल के साथ संयुक्त रूप से जलेसर क्षेत्र के सकरा मोड़ के निकट स्थित एक बंद पड़ी सोडा फैक्ट्री पर छापेमारी की। मौके पर सरकारी यूरिया (प्रधानमंत्री भारतीय जन उर्वरक यूरिया) को अवैध रूप से दूसरी बोरियो में पैक ट्रकों में लोड करते हुए पकड़ा गया।
प्रशासनिक जांच में पाया गया कि ट्रक संख्या UP 80 CT 0308 से सरकारी यूरिया को दूसरे कंटेनर ट्रक RJ 09 GE 7833 में तकनीकी ग्रेड यूरिया की बोरियों में भरकर स्थानांतरित किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि बरामद यूरिया को अंतरराज्यीय सीमा के माध्यम से राजस्थान राज्य के भरतपुर जनपद भेजने की तैयारी की जा रही थी।
छापेमारी के दौरान लगभग 670 बोरी सरकारी यूरिया बरामद की गई। मौके से एक ट्रक, एक कंटेनर, सिलाई मशीन, प्लास्टिक ड्रम, धागे के बंडल एवं खाली बोरियां भी बरामद हुईं, जिनका उपयोग यूरिया की पैकिंग एवं परिवहन में किया जा रहा था।
जिलाधिकारी अरविन्द सिंह को सूचना मिलने पर तत्काल जिला कृषि अधिकारी एवं विभागीय टीम को मौके पर भेजकर तत्काल जांच कर कड़ी कार्यवाही के निर्देश दिए, जांच के दौरान ट्रक संख्या UP 80 CT 0308 से 59 बोरी अनुदानित यूरिया एवं 591 खाली बोरियां बरामद की गईं, जबकि कंटेनर संख्या RJ 09 GE 7833 में लगभग 480 बोरी यूरिया तकनीकी ग्रेड यूरिया की बोरियों में भरी हुई पाई गई।
मौके से ट्रक चालक सहित कुल नौ व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें आवश्यक विधिक कार्रवाई हेतु पुलिस अभिरक्षा में सौंप दिया गया। जिला कृषि अधिकारी द्वारा संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985, उर्वरक (परिसंचालन) आदेश-1973 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 की धारा 3/7 के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही है।
जिलाधिकारी अरविंद सिंह के कुशल नेतृत्व एवं प्रभावी मॉनिटरिंग के चलते यह कार्रवाई समय रहते संभव हो सकी। जनपद प्रशासन द्वारा लगातार की जा रही निगरानी, सूचना तंत्र की सक्रियता तथा राजस्व, पुलिस एवं कृषि विभाग के बेहतर समन्वय ने इस बड़े अवैध कारोबार का पर्दाफाश किया।
जिलाधिकारी अरविन्द सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की जमाखोरी, कालाबाजारी अथवा सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
