फर्रुखाबाद/ इटावा-बरेली नेशनल हाईवे पर स्थित पांचाल घाट का गंगा पुल एक बार फिर अपनी जर्जर हालत को लेकर चर्चा में है। पुल के ज्वाइंट खुल जाने से लोहे के एंगल और सरिया साफ दिखाई देने लगे हैं, जिससे हजारों यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया तो कभी भी बड़ा हादसा और जनहानि हो सकती है।
करीब 50 वर्ष पुराने इस पुल से प्रतिदिन लगभग एक हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। पुल की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उसके नीचे से भी सरिया दिखाई दे रही है। वहीं ऊपर की सतह पर दो स्थानों पर ज्वाइंट खुल गए हैं। इनमें एक ज्वाइंट लगभग चार फीट तक खुला हुआ था, जबकि दूसरा करीब एक से डेढ़ फीट तक क्षतिग्रस्त हो गया था। इससे पुल की मजबूती और सुरक्षा को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है।

सूत्रों के अनुसार, प्रशासन और संबंधित विभाग ने रात के समय एक ज्वाइंट की मरम्मत कर उसे भरने का कार्य किया है तथा वहां डिवाइडर भी लगा दिया गया है। हालांकि यह केवल अस्थायी राहत मानी जा रही है। पुल की वास्तविक स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है और विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी पुरानी संरचना की व्यापक तकनीकी जांच आवश्यक है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी इसी पुल के ज्वाइंट खुलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। तब भी एंगल लगाकर और ज्वाइंट भरकर मरम्मत की गई थी। बार-बार एक ही समस्या सामने आने से लोगों में आशंका बढ़ती जा रही है कि कहीं यह पुल किसी बड़े हादसे का कारण न बन जाए।
पांचाल गंगा पुल फर्रुखाबाद को कई जनपदों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। ऐसे में पुल की जर्जर स्थिति न केवल यात्रियों बल्कि मालवाहक वाहनों के लिए भी खतरा पैदा कर रही है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन तथा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से पुल की तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराकर स्थायी समाधान कराने की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि यह पुल फोरलेन परियोजना में स्वीकृत हो चुका है, लेकिन जब तक नया निर्माण या व्यापक पुनर्निर्माण कार्य शुरू नहीं होता, तब तक वर्तमान पुल की सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। यदि जिम्मेदार विभागों ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो यह पुल कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना का गवाह बन सकता है।
