एलर्जी और अस्थमा: आईएमए सेमिनार में केजीएमयू प्रोफेसर के बड़े टिप्स, 3 में से 1 बच्चा बन सकता है अस्थमा का शिकार: डॉ. सूर्यकांत |

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Manoj Jauhri
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित...
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फर्रुखाबाद।

बचपन में बच्चों की नाक बहने की समस्या को अक्सर माता-पिता सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह लापरवाही आगे चलकर बच्चे के लिए बेहद गंभीर साबित हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, बचपन में अत्यधिक नाक बहने की समस्या से पीड़ित हर तीन में से एक बच्चा आगे चलकर अस्थमा (दमा) का शिकार हो सकता है।

यह महत्वपूर्ण जानकारी किंंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ के एलर्जी और अस्थमा विभाग के प्रोफेसर डॉ. सूर्यकांत ने दी। वह रविवार रात को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) द्वारा आयोजित एक सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे।

इन बच्चों को है अस्थमा का सबसे ज्यादा खतरा

सेमिनार के दौरान डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि देश भर में हर चौथे बच्चे को नाक की एलर्जी की शिकायत हो सकती है। उन्होंने कुछ ऐसे मुख्य कारण और परिस्थितियां बताईं, जिनमें बच्चों को अस्थमा होने का खतरा सबसे अधिक रहता है:

  1. पारिवारिक इतिहास: जिन बच्चों के माता-पिता या परिवार का कोई अन्य सदस्य पहले से अस्थमा से पीड़ित रहा हो, उन बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
  2. प्री-मैच्योर डिलीवरी: समय से पहले (नौ महीने के बजाय सात या आठ महीने में) पैदा होने वाले बच्चे।
  3. सिजेरियन डिलीवरी: सामान्य प्रसव के बजाय ऑपरेशन (सी-सेक्शन) के जरिए पैदा होने वाले बच्चे।
  4. मां का दूध न मिलना: ऐसे बच्चे जिन्हें शुरुआत में मां का दूध नसीब नहीं हुआ हो।
  5. विशेषज्ञ की सलाह: “नाक की एलर्जी केवल सांस तक सीमित नहीं होती। इसका सही समय पर इलाज न होने से यह अस्थमा का रूप ले लेती है। उपचार के दौरान केवल नाक ही नहीं, बल्कि इससे जुड़ी आंख, कान, गला, सांस और पेट की समस्याओं का भी एक साथ इलाज किया जाना चाहिए, तभी मरीज को पूरी राहत मिलेगी।

सेमिनार में ये रहे मौजूद

आईएमए (IMA) द्वारा आयोजित इस ज्ञानवर्धक सेमिनार में चिकित्सा जगत की कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम में मुख्य रूप से:

  1. डॉ. विपुल अग्रवाल (अध्यक्ष, आईएमए)
  2. डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव (सचिव, आईएमए)
  3. डॉ. आर. के. चटवाल
  4. डॉ. मनोज मल्होत्रा
  5. डॉ. अंकित मिश्रा सहित कई अन्य चिकित्सक उपस्थित रहे और उन्होंने भी बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर अपने विचार साझा किए।

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Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय समाचार सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
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