थक गए पैर, हार गयी ज़िन्दगी: 32 साल पुराने केस के आरोपी बुजुर्ग ने मौत को चुना |

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मोहम्मदाबाद / फर्रुखाबाद।

जनपद के मोहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के गांव सिकंदरपुर में शुक्रवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब ग्रामीणों ने गांव के बाहर एक जामुन के पेड़ से बुजुर्ग का शव लटकता देखा। सूचना मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया और परिजनों में कोहराम मच गया।

मृतक की पहचान नरेंद्र सिंह (पुत्र स्वर्गीय बड़े सिंह) निवासी सिकंदरपुर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने गांव के बाहर विष्णु दयाल के खेत में प्लास्टिक की रस्सी के सहारे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुबह शौच के लिए गए ग्रामीणों की नजर शव पर पड़ी, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

परिजनों के मुताबिक नरेंद्र सिंह के खिलाफ वर्ष 1992 में हत्या का मुकदमा (अपराध संख्या 41/1992) दर्ज हुआ था। इस मामले में वह वर्ष 2015 से जमानत पर बाहर चल रहे थे। हाल ही में हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें 26 अप्रैल को सीजीएम कोर्ट में पेश होना था। परिवार का कहना है कि लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया और कोर्ट के दबाव के कारण वह मानसिक तनाव में थे।

बताया गया कि बीते 14 मार्च को पुलिस की गतिविधियां बढ़ने के बाद वह अपनी बेटी रेखा के घर थाना किशनी क्षेत्र के गांव चितायन, जनपद मैनपुरी चले गए थे। वहीं से 7 मई की सुबह करीब 11 बजे वह यह कहकर निकले थे कि अपने गांव वापस जा रहे हैं, लेकिन न तो वह गांव पहुंचे और न ही दोबारा बेटी के घर लौटे। परिजन लगातार उनकी तलाश कर रहे थे।

शुक्रवार सुबह उनका शव मिलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। सूचना पर डायल 112, मोहम्मदाबाद थाना पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। उपनिरीक्षक जसवीर सिंह ने मौके पर पहुंचकर शव का पंचनामा भरवाया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। नरेंद्र सिंह अपने पीछे पत्नी मीना देवी, बेटे अंकित, उदय प्रताप और एक बेटी सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है।

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