सदी की सबसे महंगी फिल्म रामायण के टीजर से रामभक्तों में निराशा,
व्यावसायिक प्रमोशन काम नहीं आया
मृत्युंजय दीक्षित
लगभग 4000 करोड़ की लागत से बनायी जा रही फिल्म रामायण का प्रथम टीजर यूटयूब पर हनुमान जयंती के अवसर पर रिलीज किया गया । आरंभिक तौर पर पेड प्रमोशन और तगड़े पी.आर ने फिल्म को लेकर एक उत्साह का वातावरण बनाया किन्तु यह जल्दी ही ठंडा पड़ गया। रामायण के निर्माता नमित मल्होत्रा व निर्देशक नितेश तिवारी हैं जो पहले छिछोरे और दंगल जैसी फिल्में बना चुके हैं। फिल्म में अभिनेता रणबीर कपूर राम तथा दक्षिण की अभिनेत्री साई पल्लवी माता सीता की भूमिका में हैं जबकि सनी देओल हनुमान जी की भूमिका में और यश रावण की भूमिका में हैं।
हनुमान जयंती के अवसर पर जारी रामायण के टीजर साथ कैप्शन लिखा गया ,” राम सबसे महान इसलिए हैं क्योंकि उन्होंने हमेशा बड़े हित कर्तव्य को इच्छा से ऊपर और त्याग को स्वार्थ से ऊपर रखा। उनका जीवन मानवता को सशक्त बनाता है अच्छाई की आस्था जगाता है और दुनिया में शांति स्थापित करता है।” सनातनियों का मानना है कि यह परिचय (नरेशन) प्रभु राम की सनातन आस्था के प्राण तत्व से परे जाकर उनको एक साधारण तथाकथित धर्मनिरपेक्ष राजा के रूप में प्रस्तुत करता है । इस नरेशन से उनकी दिव्यता प्रकट नहीं होती।
दो मिनट 38 सेकंड का लंबा टीजर दर्शकों को फिल्म के एक्शन, एडवेंचर, किरदारों और युद्ध के दृश्यों की झलक दिखाता है। खूबसूरत विजुअल्स के बीच स्क्रीन पर एक संदेश भी दिखाया गया है जिसमें लिखा है,“ जब भी दुनिया अराजकता में डूबने लगती है तब वह हमेशा जवाब होते हैं। 5000 वर्ष से हमारे दिल पर राज करने वाले हमारे रक्षक, हमारे हीरो, हमारे लीजेंड ।हम महान मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जश्न मनाते हैं।“ यह सन्देश भी सनातनियों को भाव और भाषा की दृष्टि से नितांत सतही लगा और इसकी काफी आलोचना हो रही है।
सबसे बड़ी शिकायत फिल्म में कलाकारों के चयन को लेकर है। प्रभु राम बने रणबीर कपूर को लोग भगवान के रूप में स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। रणबीर कपूर का फिल्म की शूटिंग के दौरान शाकाहारी रहने का झूठ भी सामने आया उसका विडियो वायरल है। लोग कह रहे हैं इतने झूठे व्यक्ति को श्री राम की भूमिका में कैसे स्वीकार कर लें ? भारी मेक अप और उम्र कम करने के सारे प्रयासों के बाद भी वो औरा में इंद्रदेव से अधिक नहीं लग पा रहे हैं। कुछ लोग तो उन्हें नशे की गिरफ्त में बता रहे हैं। उनमें सौम्यता व शांति का अभाव है और उनके चेहरे व हावभाव में क्रोध व अहंकार है। साईं पल्लवी भारत विरोधी विचारों, पाकिस्तान के आतंकवादियों के प्रति अपने प्रेम को लेकर चर्चा में रही हैं। माता सीता के रूप में उनके चयन का विरोध पहले दिन से ही हो रहा है।
सबसे कमज़ोर पक्ष अल्ला रक्खा का संगीत है, जो भारत के दैवीय शास्त्रीय संगीत की जगह अरेबियन नाइट्स के संगीत की तरह है। अल्ला रक्खा अब एक चुके हुए, अपने आप को रिपीट करने वाले संगीतकार बनकर रह गए हैं।
कुल मिलाकर तमाम पी आर के बाद भी फिलहाल टीज़र रामभक्तों को रिझाने में असफल रहा है, फिल्म का हश्र तो उसके रिलीज़ होने के बाद ही पता चलेगा।
