कोसी/ मथुरा
1)मथुरा में कोसीकलां के गांव फालैन में सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत किया गया. यहां पर जलती हुई होली की बीस फुट ऊंची लपटों के बीच से संजू पांडा ने नंगे पैर दौड़ लगा दी.
2)होलिका दहन की रात जैसे ही आग की लपटें आसमान छूने लगीं, वैसे ही लोगों की धड़कनें भी तेज हो गईं. चारों तरफ जयकारों की गूंज में इस परंपरा को निभाया गया.
3)मान्यता है कि इसी स्थान पर भक्त प्रह्लाद की अग्नि परीक्षा की. जिसकी याद में हर साल इसे दोहराया जाता है. संजू पंडा वसंत पंचमी से ही विशेष व्रत और तपस्या में जुट जाते हैं. वे परिवार से दूर रहकर प्रह्लाद मंदिर में जप-तप करते हैं.
4)इस दौरान वे अन्न का त्याग कर केवल फलाहार ग्रहण करते हैं, जमीन पर सोते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ साधना करते हैं. होलिका दहन के दिन सबसे पहले मंदिर में विधि-विधान से पूजा अर्चना की जाती है. इसके बाद संजू पंडा प्रह्लाद कुंड में स्नान करते हैं.
5)परंपरा के अनुसार उनकी बहन जलती होलिका में दूध अर्पित कर अग्नि को शांत करने की प्रार्थना करती हैं. इसके बाद वह क्षण आता है जिसका सभी को इंतजार रहता है.
6)होलिका दहन की लपटों के बीच संजू पंडा दौड़ते हुए अग्नि में प्रवेश करते हैं और कुछ ही पलों में सुरक्षित बाहर निकल आते हैं. यह दृश्य हर किसी को आश्चर्यचकित कर देता है.
7)इस परंपरा को निभाने वाले संजू पांडा ने कहा कि जब मैं आग के बीच से निकलता हूं तो मुझे साक्षात भक्त प्रह्लाद दिखाई देते हैं. उस समय आग की लपटें जलाती नहीं, बल्कि ठंडी महसूस होती हैं. यह सब भगवान की कृपा है.
8)ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा उनके परिवार में सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है और इसे पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ निभाया जाता है. आस्था और विश्वास की यह अनोखी परंपरा हर साल लोगों को चौंकाती भी है और आकर्षित भी करती है.
9)फालैन गांव की यह होली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि श्रद्धा, तप और विश्वास का जीवंत उदाहरण बन चुकी है.
चमत्कार पर विश्वास..
आजकल के युवाओं को इस प्रकार की होली देखनी चाहिए.फलैन गांव,प्रसिद्ध होलिका दहन वृंदावन शहर से 55 किलोमीटर दूर इस गांव आज भी होलिका दहन के दिन प्रहलाद जलती आग की लपटों बाहर निकलते दृश्य दिखाई देता हैं. यहां होलिका 20 फीट ऊंची 30 फीट लंबी बनाई जाती है. जिसे देखने के लिए हजारों लोग दूर दराज यहां पर आते हैं। जब यहां होलिका जलाई जाती है तो 10 फीट तक लोग खड़ा होना मुश्किल होता है।इस स्थान पर हर साल पंडा द्वारा होलिका दहन की अग्निकुंड पार कर ली जाती है.
