*नारी*
(अंजली)
नारी जब होती उद्देश्य पूर्ण,
तभी वो होती है सम्पूर्ण ।
जैसे वो होती है चूर,
तभी निखरती है उसमें नूर।
नारी ने क्या -क्या नही किया,
नर जन का है जहर पिया।
यह एक ऐसी प्राणी है,
जो हर जीवन में न्यारी है ।
लोक लज्जा से कैसे सम्पन्न,
जब तक उनमें प्रेम नहीं उत्पन्न।
मांगो ने है उनको लाया,
और प्रेम ने उन्हें रुलाया ।
पाने की चाह बस न थी खुदको,
बस पाने की चाहत थी तुझको।
नारी ने नर से बस इतना माँगी,
बन जा नर तू मेरा सच्चा साथी ।
नारी के रूप होते कई,
दुर्गा, काली, शीतला माई।
नर की भी सहयोगी होती.
मेरी तो इतनी इच्छा होती।
लेखिका – कु० अंजली
