फर्रुखाबाद/
जनपद के ऐतिहासिक पांचाल घाट पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले प्रसिद्ध श्रीरामनगरिया मेला एवं विकास प्रदर्शनी-2027 को इस बार और अधिक भव्य, आकर्षक एवं सुविधाजनक बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। गंगा की पावन धारा के किनारे लगने वाले इस धार्मिक मेले में हजारों श्रद्धालुओं, साधु-संतों और कल्पवासियों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने अभी से व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की कवायद तेज कर दी है। इसी क्रम में जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर और पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने पांचाल घाट पहुंचकर मेला स्थल का स्थलीय निरीक्षण किया और तैयारियों की हकीकत परखी।
प्रशासनिक अधिकारियों के निरीक्षण से मेला तैयारियों को गति मिल गई है। अधिकारियों ने मेला क्षेत्र का भ्रमण कर श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, आवागमन और ठहरने के इंतजामों का जायजा लिया। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मेले की तैयारियों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। सभी व्यवस्थाएं समय रहते पूरी कर ली जाएं, जिससे मेला शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
गंगा घाटों पर रहेगी विशेष निगरानी, श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि
रामनगरिया मेले में गंगा स्नान का विशेष धार्मिक महत्व है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा में आस्था की डुबकी लगाने पहुंचते हैं। इसे देखते हुए प्रशासन की ओर से अस्थायी स्नान घाटों का निर्माण कराया जाएगा। घाटों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाएंगे, जिससे स्नान के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने और आवागमन को सुचारु बनाए रखने के लिए भी विशेष व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
साफ-सफाई, पेयजल और ठहरने की सुविधाओं पर रहेगा फोकस
मेले में आने वाले कल्पवासियों और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल है। मेला क्षेत्र में नियमित साफ-सफाई, स्वच्छ पेयजल, सुगम रास्ते और ठहरने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। संबंधित विभागों को आपसी तालमेल के साथ जिम्मेदारी निभाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का प्रयास है कि पूरे मेला क्षेत्र में स्वच्छता और सुव्यवस्था बनी रहे।
साधु-संतों की राय से संवरेंगी व्यवस्थाएं
रामनगरिया मेला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि जनपद की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का भी प्रतीक है। यहां दूर-दराज से साधु-संत, महात्मा और कल्पवासी पहुंचकर गंगा तट पर धार्मिक अनुष्ठान एवं कल्पवास करते हैं। इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए प्रशासन मेले की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने से पहले साधु-संतों के सुझावों को भी शामिल करेगा, ताकि उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप सुविधाएं विकसित की जा सकें।
‘उत्तर प्रदेश दर्शन’ बनेगा प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण
इस बार विकास प्रदर्शनी-2027 में ‘उत्तर प्रदेश दर्शन’ थीम को विशेष रूप से आकर्षक बनाया जाएगा। इसके माध्यम से प्रदेश की धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण धरोहरों की झलक एक ही स्थान पर देखने को मिलेगी। इसके साथ ही मेले में आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए फूड कोर्ट भी विकसित किया जाएगा, जहां उन्हें खानपान की बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
22 जनवरी से शुरू होकर 20 फरवरी तक चलेगा मेला
पांचाल घाट पर श्रीरामनगरिया मेला एवं विकास प्रदर्शनी-2027 का आयोजन 22 जनवरी से 20 फरवरी 2027 तक प्रस्तावित है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे निर्धारित समयसीमा के भीतर अपनी तैयारियां पूरी कर लें। पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने भी सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
