फर्रुखाबाद।
औद्योगिक क्षेत्र में अचानक गैस रिसाव हो जाए और देखते ही देखते आग भड़क उठे, तो हालात कितने चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, इसका अंदाजा लगाने और ऐसी परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए मंगलवार को गैसिंगपुर स्थित इंडेन बॉटलिंग प्लांट में संयुक्त मॉक ड्रिल आयोजित की गई। गैस रिसाव के बाद आग लगने की काल्पनिक घटना को आधार बनाकर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया। इस दौरान एनडीआरएफ, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग और जिला प्रशासन से जुड़े अधिकारियों ने आपातकालीन परिस्थितियों में अपनी प्रतिक्रिया, आपसी तालमेल और उपलब्ध संसाधनों के इस्तेमाल की तैयारियों को परखा।
8वीं वाहिनी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), गाजियाबाद और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, फर्रुखाबाद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कवायद का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक दुर्घटनाओं के दौरान जान-माल के नुकसान को कम करना और आपात स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना रहा। मॉक ड्रिल के जरिए यह अभ्यास किया गया कि गैस रिसाव जैसी गंभीर परिस्थिति सामने आने पर संबंधित विभाग किस तरह सक्रिय होंगे और राहत-बचाव कार्यों को किस प्रकार व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जाएगा।
पहले कलेक्ट्रेट में बनी रणनीति, फिर प्लांट में परखी गई तैयारियां
संयुक्त मॉक एक्सरसाइज की तैयारियों के तहत 12 अक्टूबर को फतेहगढ़ स्थित कलेक्ट्रेट सभागार में ओरिएंटेशन एवं समन्वय बैठक के साथ टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की गई थी। इसमें जिलाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और संबंधित हितधारक शामिल हुए। बैठक में औद्योगिक आपदा की स्थिति में अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारियों, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस दौरान इंडेन बॉटलिंग प्लांट, गैसिंगपुर के मुख्य संयंत्र प्रबंधक ने इन्सिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (आईआरएस) के संबंध में प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें बताया गया कि किसी बड़ी औद्योगिक दुर्घटना के समय विभिन्न विभागों के बीच जिम्मेदारियों का निर्धारण, उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग और त्वरित कार्रवाई किस प्रकार की जानी चाहिए। बैठक के बाद प्लांट में गैस रिसाव से आग लगने की काल्पनिक स्थिति को लेकर मॉक ड्रिल की कार्ययोजना तैयार की गई।
सुबह 11 बजे शुरू हुई कवायद, राहत-बचाव से लेकर अग्निशमन तक का अभ्यास
मंगलवार सुबह 11 बजे इंडेन बॉटलिंग प्लांट परिसर में मॉक ड्रिल आयोजित की गई। अभ्यास के दौरान गैस रिसाव के कारण आग लगने की काल्पनिक स्थिति को सामने रखकर संबंधित एजेंसियों की प्रतिक्रिया और आपातकालीन व्यवस्थाओं का परीक्षण किया गया। इसमें अग्निशमन व्यवस्था सक्रिय करने, प्रभावित क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने, चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और यातायात प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों का अभ्यास किया गया।
इस पूरी कवायद में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल करने पर विशेष जोर दिया गया। औद्योगिक दुर्घटना के दौरान समय पर सूचना मिलने, संबंधित एजेंसियों के सक्रिय होने और राहत-बचाव कार्यों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की प्रक्रिया को भी अभ्यास के माध्यम से परखा गया।
एनडीआरएफ समेत कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद
मॉक ड्रिल में 8वीं वाहिनी एनडीआरएफ, गाजियाबाद के डिप्टी कमांडेंट डॉ. कुबेर शर्मा और निरीक्षक भीम सिंह सहित उप जिलाधिकारी सदर, सहायक परिवहन अधिकारी, सहायक मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, इंडेन बॉटलिंग प्लांट के मुख्य संयंत्र प्रबंधक तथा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आपदा विशेषज्ञ और अन्य संबंधित अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।
विभिन्न विभागों की सहभागिता का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी वास्तविक आपदा के दौरान सभी एजेंसियां अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों के अनुरूप काम करें। साथ ही, राहत-बचाव कार्यों के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो और उपलब्ध संसाधनों का जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किया जा सके।
औद्योगिक हादसों से निपटने के लिए तैयारियों को मजबूत करने पर जोर
गैसिंगपुर स्थित इंडेन बॉटलिंग प्लांट में आयोजित इस संयुक्त मॉक ड्रिल के माध्यम से औद्योगिक प्रतिष्ठानों में संभावित गैस रिसाव और आग लगने जैसी आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों का आकलन किया गया। इस तरह के अभ्यास का उद्देश्य केवल राहत-बचाव प्रक्रिया का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि वास्तविक दुर्घटना के समय विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली, संसाधनों की उपलब्धता और आपसी तालमेल को अधिक प्रभावी बनाना भी है।
अधिकारियों के अनुसार, औद्योगिक प्रतिष्ठानों में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत बनाए रखने के लिए समय-समय पर इस तरह की मॉक एक्सरसाइज जरूरी हैं। इनके जरिए आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया देने, प्रभावित क्षेत्र में राहत पहुंचाने और संभावित जन-धन की हानि को न्यूनतम करने की दिशा में व्यवस्थाओं को परखा जा सकता है।
