कायमगंज/फर्रुखाबाद।
कायमगंज नगर के सीपी ग्राउंड में रात आयोजित रामलीला में उस समय भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब भगवान श्रीराम ने भगवान शिव के पिनाक धनुष को तोड़कर माता सीता के स्वयंवर की कठिन शर्त पूरी कर दी। धनुष टूटते ही पूरा रामलीला परिसर ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद माता सीता ने प्रभु श्रीराम के गले में वरमाला डालकर उन्हें अपने वर के रूप में स्वीकार किया। इस मनोहारी दृश्य को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
श्रीरामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में रामायण के प्रमुख प्रसंगों का जीवंत मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय, प्रभावशाली संवादों और शानदार प्रस्तुति से दर्शकों को देर रात तक कार्यक्रम से जोड़े रखा। सीता स्वयंवर के साथ रावण-बाणासुर संवाद और लक्ष्मण-परशुराम संवाद ने आयोजन में रोमांच, हास्य और भक्तिरस का रंग भर दिया।
बड़े-बड़े राजा-महाराजा नहीं हिला सके शिवधनुष, सभा में छाई मायूसी
रामलीला के मंच पर सीता स्वयंवर का प्रसंग शुरू होते ही दर्शक रामायण की कथा में खो गए। मंचन में दिखाया गया कि मिथिला के राजा जनक ने अपनी पुत्री माता सीता के विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन किया था। स्वयंवर में शर्त रखी गई कि जो भी वीर भगवान शिव के विशाल धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने में सफल होगा, उसी के साथ माता सीता का विवाह होगा।
राजा जनक की इस कठिन शर्त को पूरा करने के लिए दूर-दराज से आए अनेक राजा-महाराजा और पराक्रमी योद्धा अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने पहुंचे। सभी ने शिवधनुष उठाने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी सफल नहीं हो सका। बड़े-बड़े वीरों को असफल होते देख स्वयंवर सभा में निराशा का माहौल छा गया। राजा जनक भी अपनी पुत्री के विवाह को लेकर चिंतित दिखाई दिए। इस दृश्य का कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय के साथ मंचन किया।
गुरु विश्वामित्र की आज्ञा मिलते ही आगे बढ़े श्रीराम, एक ही पल में टूट गया धनुष
जब स्वयंवर में उपस्थित कोई भी राजा शिवधनुष को हिला तक नहीं सका, तब महर्षि विश्वामित्र ने भगवान श्रीराम को धनुष उठाने की आज्ञा दी। गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए प्रभु श्रीराम पूरे सहज भाव से धनुष के पास पहुंचे। उन्होंने जैसे ही शिवधनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया, धनुष जोरदार ध्वनि के साथ टूट गया।
धनुष टूटने की आवाज गूंजते ही पूरा सीपी ग्राउंड जयकारों से भर उठा। दर्शकों ने ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष के साथ इस प्रसंग का स्वागत किया। इसके बाद माता सीता ने प्रभु श्रीराम के गले में वरमाला पहनाई। स्वयंवर का यह दृश्य रामलीला की प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा। मंच पर सजी इस मनोहारी प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
रावण-बाणासुर के संवादों ने बढ़ाया रोमांच, कलाकारों की अदाकारी पर बजीं तालियां
धनुष भंजन के बाद रामलीला में रावण और बाणासुर के बीच संवादों का मंचन किया गया। दोनों पात्रों के बीच हुए रोचक संवादों और प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। कलाकारों ने अपने संवाद बोलने के अंदाज और भाव-भंगिमाओं से मंच पर ऐसा वातावरण तैयार किया कि दर्शक पूरे समय प्रस्तुति से जुड़े रहे।
रामलीला के इस प्रसंग में जहां एक ओर पौराणिक कथा का गंभीर पक्ष सामने आया, वहीं दूसरी ओर कलाकारों की संवाद अदायगी ने दर्शकों में रोमांच बनाए रखा। समय-समय पर दर्शकों की तालियों से पूरा परिसर गूंजता रहा।
परशुराम के प्रचंड क्रोध के सामने लक्ष्मण के व्यंग्यपूर्ण जवाब, खूब लगे ठहाके
शिवधनुष टूटने की आवाज सुनकर भगवान परशुराम के क्रोधित होकर स्वयंवर सभा में पहुंचने का प्रसंग भी मंचित किया गया। धनुष टूटने से नाराज परशुराम और लक्ष्मण के बीच तीखे संवादों ने रामलीला में अलग ही रंग जमा दिया। एक ओर भगवान परशुराम का प्रचंड क्रोध देखने को मिला, तो दूसरी ओर लक्ष्मण के चुटीले और व्यंग्यपूर्ण जवाबों ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया।
दोनों पात्रों के बीच संवादों के उतार-चढ़ाव पर दर्शक कभी तालियां बजाते तो कभी ठहाके लगाते नजर आए। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से इस पौराणिक प्रसंग को जीवंत बना दिया।
