फर्रुखाबाद।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन सोमवार को उस समय तेज हो गया, जब लखनऊ जा रहे कर्मचारियों की बस को थाना जहानगंज में रोके जाने का मामला सामने आया। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करने और उनकी मांगों पर वार्ता करने की अपील की है।
संगठन के मुताबिक, बस में 55 कर्मचारी सवार थे। पुलिस द्वारा बस रोके जाने के बाद कर्मचारियों ने सड़क जाम कर विरोध जताया। वहीं, कुछ कर्मचारी करीब 15 छोटे वाहनों से लखनऊ की ओर रवाना हो गए। संघ का कहना है कि कर्मचारियों के लखनऊ जाने के कार्यक्रम की जानकारी शासन को पहले ही ज्ञापन के माध्यम से दी जा चुकी थी।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि कर्मचारी नियमितीकरण, समान कार्य-समान वेतन और सेवा संबंधी सुविधाओं की मांग सरकार तक पहुंचाने जा रहे थे। ऐसे में उनकी समस्याओं पर बातचीत कर समाधान निकालने की पहल की जानी चाहिए। हालांकि, बस रोके जाने की कार्रवाई को लेकर प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
एक लाख से अधिक संविदा कर्मचारियों की सेवाओं का हवाला
संगठन के अनुसार, प्रदेश में एक लाख से अधिक NHM संविदा कर्मचारी लंबे समय से स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं दे रहे हैं। प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों तथा विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। कोविड-19 महामारी के दौरान भी इन कर्मचारियों ने स्वास्थ्य सेवाओं को जारी रखने में योगदान दिया था।
इसके बावजूद कर्मचारियों का आरोप है कि लंबे समय से सेवाएं देने के बाद भी उन्हें नियमितीकरण, वेतन सुरक्षा और नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। नौकरी की अनिश्चितता और सीमित मानदेय के बीच काम करना उनके लिए चुनौती बना हुआ है।
छह प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन
संघ ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में छह प्रमुख मांगें उठाई हैं। इनमें संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण, समान कार्य-समान वेतन, वर्तमान मानदेय में वृद्धि, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, महंगाई भत्ता तथा ईपीएफ, एचआरए और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त गैर-जनपद स्थानांतरण नीति लागू करने, सेवाकाल में कर्मचारी की मृत्यु होने पर पात्र आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति देने, आउटसोर्स कर्मचारियों के समायोजन और नियमित पदों की भर्ती में NHM संविदा कर्मचारियों के लिए कम से कम 25 प्रतिशत कोटा निर्धारित करने की मांग भी की गई है।
12 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
संगठन ने 3 अक्टूबर को जारी ज्ञापन में चरणबद्ध आंदोलन का कार्यक्रम घोषित किया था। इसके तहत 5 से 7 अक्टूबर तक काली पट्टी बांधकर विरोध और 8 से 10 अक्टूबर तक कार्य बहिष्कार का कार्यक्रम रखा गया था। इसके बाद 12 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई थी।
अब लखनऊ कूच के दौरान बस रोके जाने के मामले ने आंदोलन को और तेज कर दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे और संगठन के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता कर समाधान निकाले।
स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर
NHM संविदा कर्मचारियों की संभावित अनिश्चितकालीन हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में कर्मचारियों की मांगों और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता, दोनों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालना जरूरी माना जा रहा है।
