कायमगंज/फर्रुखाबाद।
पितृपक्ष के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथावक्ता श्री शिवानंद भाई महाराज ने ध्रुव, प्रह्लाद, समुद्र मंथन और वामन अवतार सहित भगवान श्रीकृष्ण जन्म का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालुओं को भक्ति, संस्कार, विनम्रता और भगवान के नाम-स्मरण का संदेश दिया गया।
ध्रुव चरित्र के माध्यम से उन्होंने कहा कि अपमान और विपरीत परिस्थितियों को कमजोरी नहीं, बल्कि साधना की शक्ति बनाना चाहिए। प्रह्लाद चरित्र में अटूट भक्ति और विश्वास का संदेश दिया गया। समुद्र मंथन के प्रसंग से जीवन में आने वाले तानों और कठिनाइयों का धैर्यपूर्वक सामना करने की प्रेरणा दी गई।
वामन अवतार और राजा बलि की कथा के माध्यम से दान, वचनबद्धता और समर्पण का महत्व बताया गया। कथावक्ता ने कहा कि भगवान की प्राप्ति के लिए प्रेम, श्रद्धा और शुद्ध आचरण आवश्यक हैं।
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आते ही पंडाल ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से कृष्ण जन्मोत्सव मनाया। कथावक्ता ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन धर्म, प्रेम, कर्म और लोककल्याण की प्रेरणा देता है।

