आधी रात JCB से ढहाई 35 साल पुराने विवादित मकान की दीवार, सोते दंपती बाल-बाल बचे; पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल |

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Manoj Jauhri
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित...
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कम्पिल/फर्रुखाबाद/

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करीब 35 साल पुराने पुश्तैनी मकान के स्वामित्व और कब्जे को लेकर चल रहा विवाद अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। न्यायालय में मुकदमे विचाराधीन होने के बावजूद मकान खाली कराने के लिए दबाव बनाने और आधी रात जेसीबी से मकान की दीवार गिराने का सनसनीखेज आरोप सामने आया है। शिकायतकर्ता महिला का दावा है कि घटना के समय वह और उसका पति दीवार के पास सो रहे थे। अचानक जेसीबी से दीवार गिराई गई, जिससे दोनों बाल-बाल बच गए। महिला ने पूरी घटना के सीसीटीवी कैमरे में कैद होने का दावा करते हुए पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।

कम्पिल थाना क्षेत्र के मांझगांव पश्चिम, वार्ड संख्या छह निवासी अनीता सक्सेना पत्नी राकेश कुमार सक्सेना ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की शिकायत की है। महिला ने मकान पर अपना कब्जा बताते हुए कहा है कि संपत्ति को लेकर विभिन्न न्यायालयों में मुकदमे चल रहे हैं और वह न्यायालय के अंतिम आदेश का पालन करने को तैयार हैं, लेकिन इसके बावजूद उन पर मकान खाली करने का कथित रूप से दबाव बनाया जा रहा है।

पुराना मकान, वर्षों पुराना विवाद और अदालत तक पहुंचा मामला

शिकायतकर्ता के अनुसार उनके ससुर स्वर्गीय जसवंत राय पुत्र स्वर्गीय रामस्वरूप लंबे समय से उक्त पुश्तैनी मकान पर काबिज रहे। वर्ष 1978-79 में नगर पंचायत गठन के बाद मकान पर हाउस टैक्स लगाया गया और उनके ससुर द्वारा लगातार टैक्स जमा किया जाता रहा। उनके निधन के बाद उनके पति राकेश कुमार द्वारा भी हाउस टैक्स जमा किए जाने की बात कही गई है। प्रार्थना पत्र में वर्ष 2024 तक जलकर आदि जमा किए जाने के दस्तावेज होने का भी उल्लेख किया गया है।

महिला के मुताबिक मकान को लेकर वर्ष 1983 के एक कथित बिक्री विलेख के आधार पर विवाद खड़ा हुआ। इसके बाद वर्ष 1990 में दीवानी न्यायालय में मुकदमा संख्या 576/1990 दाखिल किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि मुकदमे की कार्यवाही के दौरान कब्जे को लेकर अलग-अलग बयान सामने आए और मूल वाद अंततः 2 जुलाई 2022 को निरस्त हो गया।

‘मुकदमा जीत गए, मकान खाली करो’—महिला का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फरवरी 2025 के प्रथम सप्ताह में अशोक कुमार पुत्र मुरारीलाल अपने साथ कुछ लोगों को लेकर मकान पर पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने राकेश कुमार से मकान खाली करने को कहा और दावा किया कि मुकदमा उनके पक्ष में हो गया है।

महिला के अनुसार जब उसके पति ने न्यायालय का आदेश दिखाते हुए मकान खाली करने से इनकार किया तो कथित रूप से धमकी और दबाव का दौर शुरू हो गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद उसके पति ने अपने कब्जे और अधिकार को लेकर न्यायालय में मूलवाद संख्या 80/2025 दाखिल किया। मामले में नोटिस जारी होने तथा मौके के निरीक्षण के लिए कमीशन जारी किए जाने की बात भी प्रार्थना पत्र में कही गई है।

विवादित मकान का फिर बैनामा, दोबारा अदालत की शरण

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि 14 फरवरी 2025 को अशोक कुमार और उनके भाइयों द्वारा विवादित मकान का बैनामा कुछ अन्य लोगों के पक्ष में करा दिया गया। इसको लेकर भी राकेश कुमार ने न्यायालय की शरण ली। महिला के अनुसार इस मामले में जवाब दाखिल हो चुके हैं और 25 सितंबर 2026 को सुनवाई की तारीख नियत है।

इसी बीच आधी रात हुई घटना ने पूरे विवाद को और गरमा दिया है।

पहले थाने बुलाने का आरोप, फिर आधी रात JCB की दस्तक

अनीता सक्सेना का आरोप है कि 7 सितंबर को उसके पति को पुलिस के माध्यम से थाने बुलाया गया। महिला के मुताबिक सुबह करीब आठ बजे से दस बजे तक उन्हें पुलिस कार्यालय में बैठाकर मकान खाली करने का दबाव बनाया गया। शिकायत में कम्पिल थाने में तैनात दरोगा दिनेश सिंह यादव पर भी कथित रूप से दबाव बनाने का आरोप लगाया गया है।

महिला का कहना है कि उसके पति ने साफ कहा कि बैनामा निरस्तीकरण और मकान से जुड़ा विवाद न्यायालय में विचाराधीन है और अदालत का जो अंतिम आदेश होगा, उसका पालन किया जाएगा। इसके बावजूद कथित रूप से उन्हें डराया-धमकाया गया।

रात 2:45 बजे पहुंची JCB, सोते दंपती के ऊपर ढहा दी दीवार

शिकायत के अनुसार 10/11 सितंबर की रात करीब 2:30 से 2:45 बजे के बीच अचानक जेसीबी मशीन और पुलिस की गाड़ी मौके पर पहुंची। महिला का आरोप है कि पुलिस बल की मौजूदगी में जेसीबी से मकान की दीवार गिरा दी गई।

सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई गई है कि जिस समय दीवार गिराई गई, उस समय महिला और उसका पति मकान के बाहर उसी दीवार के पास सो रहे थे। दीवार भरभराकर गिरते ही दोनों की नींद खुली और वे किसी तरह हटकर अपनी जान बचाने में सफल हुए। महिला का आरोप है कि यदि समय रहते नींद नहीं खुलती तो दोनों मलबे में दब सकते थे।

घटना के बाद शोर सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिसकर्मी उसे और उसके पति को बातचीत में उलझाए रहे और इसी दौरान जेसीबी चालक मौके से चला गया।

‘दबंगों के आगे पुलिस नतमस्तक’—महिला ने लगाए गंभीर आरोप

पीड़िता ने अपनी शिकायत में कुछ लोगों पर पुलिस से कथित मिलीभगत कर मकान पर कब्जा कराने का आरोप लगाया है। उसने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा दो दिन तक थाने बुलाकर दबाव बनाया गया और मकान खाली करने के लिए कथित रूप से धमकाया गया।

महिला ने कहा कि वह किसी दबाव में मकान खाली नहीं करेगी और न्यायालय का जो अंतिम आदेश होगा, वही उसके लिए मान्य होगा।

CCTV फुटेज को बनाया आधार, SP से लगाई न्याय की गुहार

पीड़िता ने पूरी घटना के सीसीटीवी कैमरे में कैद होने का दावा किया है। उसने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर घटना की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने और अपने पति, बच्चों तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की मांग की है।

महिला ने शिकायत के साथ मकान पर अपने कब्जे से संबंधित हाउस टैक्स और जलकर की रसीदों सहित न्यायालय में चल रहे मुकदमों से संबंधित दस्तावेज भी संलग्न किए हैं।

अब जांच पर टिकी निगाहें

फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन संपत्ति विवाद से जुड़ा होने के साथ-साथ पुलिस की कथित भूमिका के आरोपों के कारण भी चर्चा में है। शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मकान के वास्तविक स्वामित्व, कब्जे तथा आधी रात जेसीबी से दीवार गिराए जाने की घटना की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच और न्यायालय की कार्यवाही के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। अब देखना यह है कि पुलिस अधीक्षक की शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है और कथित CCTV फुटेज की जांच के बाद मामले में क्या नया खुलासा सामने आता है।

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Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय समाचार सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
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