कायमगंज/फर्रुखाबाद।
हज़रत बाबा जूही शाह रहमतुल्लाह अलैह के आस्ताना आलिया स्थित दरगाह बाबा शाह पर 17वीं शरीफ़ एवं लंगर का आयोजन श्रद्धा और अकीदत के साथ किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर नजर-फातिहा में हिस्सा लिया और लंगर ग्रहण कर आपसी भाईचारे एवं सौहार्द का संदेश दिया।
इस अवसर पर दरगाह के सज्जादानशीन सूफी हज़रत मुशीर अहमद क़ादरी चिश्ती वारसी ने कहा कि नजर एवं लंगर का उद्देश्य लोगों को औलिया-ए-किराम की शिक्षाओं से जोड़ना और उनकी महान जीवनशैली से परिचित कराना है। उन्होंने बताया कि हज़रत बाबा जूही शाह ने अपना संपूर्ण जीवन मानव सेवा, त्याग, सादगी और इबादत को समर्पित किया। वे स्वयं भूखे रहकर भी जरूरतमंदों को भोजन कराने की शिक्षा देते थे और इंसानियत की सेवा को सबसे बड़ा धर्म मानते थे।
उन्होंने कहा कि सूफी संतों ने हमेशा प्रेम, भाईचारे, आपसी सौहार्द और इंसानियत का संदेश दिया है। दरगाहें आज भी सामाजिक समरसता की प्रतीक हैं, जहां बिना किसी जाति, धर्म और वर्ग के भेदभाव के हर व्यक्ति समान भाव से आता है और बुजुर्गों की दुआओं व फैज़ से लाभान्वित होता है।
सूफी मुशीर अहमद क़ादरी ने युवाओं और बच्चों को शिक्षा का महत्व समझाते हुए कहा कि नई पीढ़ी को अच्छी तालीम, नैतिक संस्कार, पर्यावरण संरक्षण और अपने देश के प्रति प्रेम एवं वफादारी की भावना सिखाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से पेड़-पौधों की रक्षा करने तथा समाज में प्रेम और सद्भाव बनाए रखने का आह्वान किया।
नजर-फातिहा के उपरांत सभी श्रद्धालुओं के लिए लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
कार्यक्रम में मुफ्ती मुनीर अहमद नूरी, हाफिज आजम खान, आमिर हुसैन जूही, शानू, तौहीद, बबलू, धनेश गौर, सनी बॉथम, मुन्ना राजपूत, नोमान सिद्दीकी, संजय शर्मा, हैदर खान, आरिफ अंसारी, फहीम सिद्दीकी, अमरेश गंगवार, रुखसार खान, खलील भाई, लाल मियां, मोहम्मद जैनुल, शमशाद भाई, अभिषेक, गुड्डू मंसूरी, मिहाद फातिमा सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद उपस्थित रहे।
