अमरोहा में हसनपुर के भावली गांव में घुटनों तक गंदे पानी से होकर गुजरी अर्थी
जनरल फोर्स ब्यूरो/अमरोहा
अमरोहा। विकास के बड़े-बड़े दावों और वादों के बीच अमरोहा जनपद से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा है। यह तस्वीर किसी पिछड़े इलाके की नहीं, बल्कि अमरोहा जिले की हसनपुर विधानसभा क्षेत्र के गांव ‘भावली’ की है। यहां की सड़कें अब सड़कें नहीं रहीं, बल्कि गंदे तालाब में तब्दील हो चुकी हैं। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि ग्रामीणों को एक अंतिम यात्रा (अर्थी) भी इसी घुटनों तक भरे गंदे पानी से होकर निकालनी पड़ी। इस मार्मिक दृश्य का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने विकास की सारी पोल खोल कर रख दी है।
10 साल से जलभराव की मार झेल रहा भावली वायरल वीडियो और ग्रामीणों के अनुसार, भावली गांव पिछले करीब 10 वर्षों से जलभराव की इस भयानक समस्या से जूझ रहा है। जल निकासी की कोई उचित व्यवस्था न होने के कारण गांव के मुख्य रास्तों पर हर समय गंदा पानी भरा रहता है। बच्चों का स्कूल जाना हो, महिलाओं का निकलना हो या फिर किसी बीमार को अस्पताल ले जाना हो, ग्रामीणों को रोज इसी नरक से होकर गुजरना पड़ता है।
गंदे पानी से गुजरी अंतिम यात्रा, पसीज गया दिल सिस्टम की लापरवाही का सबसे खौफनाक मंजर तब देखने को मिला, जब गांव में एक निधन के बाद उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि अंतिम यात्रा में शामिल लोग घुटनों तक भरे गंदे और बदबूदार पानी के बीच से अर्थी लेकर गुजर रहे हैं। यह दृश्य देखकर किसी का भी दिल पसीज जाए, लेकिन ऐसा लगता है कि जिम्मेदार अधिकारियों की संवेदनाएं पूरी तरह से मर चुकी हैं।
नेताओं और अधिकारियों से उठ गया भरोसा? ग्रामीणों का कड़ा आरोप है कि वे पिछले कई वर्षों से लगातार जल निकासी की मांग कर रहे हैं। प्रधान से लेकर बड़े जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों तक, हर किसी के दरवाजे खटखटाए गए, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। चुनाव के वक्त वादे तो बहुत होते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इस गंदे पानी में डूब जाती है।
अब प्रशासन से है यह बड़ा सवाल इस दर्दनाक वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग प्रशासनिक व्यवस्थाओं को जमकर कोस रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस वायरल वीडियो के बाद अमरोहा का सोया हुआ प्रशासन जागेगा और गांव भावली की इस वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या का कोई ठोस समाधान करेगा? या फिर ग्रामीणों को आगे भी इसी तरह गंदे पानी और बीमारियों के बीच घुट-घुट कर अपना जीवन बिताना पड़ेगा?
