कम्पिल बनेगा वर्ल्ड क्लास टूरिस्ट हब, 4.70 करोड़ की परियोजना से

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Manoj Jauhri
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित...
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कम्पिल/ फर्रूखाबाद/

महाभारत काल की स्मृतियों को संजोए उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक काम्पिल्य (कंपिल) अब विश्व स्तरीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने की ओर अग्रसर है। प्रदेश सरकार ने महाभारत सर्किट के अंतर्गत फर्रुखाबाद जिले के इस पौराणिक स्थल के समेकित विकास के लिए 4.70 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी देते हुए प्रथम किश्त के रूप में 1.40 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘द्रौपदी की जन्मस्थली सहित अनेक सांस्कृतिक धरोहरों की धरती काम्पिल्य को संवारने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।’

मंत्री ने बताया कि ‘उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग काम्पिल्य में आधुनिक पर्यटक सुविधाएं विकसित कर रहा है। उन्होंने बताया कि महाभारत सर्किट अंतर्गत द्वापर युगीन इस प्राचीन भूमि को पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके। आगंतुकों को तकनीक के माध्यम से उस दौर के इतिहास और घटनाओं से रूबरू कराया जाएगा। इसके लिए इंटरैक्टिव इंटरप्रिटेशन इंस्टॉलेशन की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में 21.67 लाख पर्यटक फर्रुखाबाद जनपद पहुंचे, जिनमें विदेशी पर्यटक भी बड़ी संख्या में रहे।’ 

काम्पिल्य में सजीव होंगे महाभारत के प्रसंग

महाभारत सर्किट के अंतर्गत विकसित किए जा रहे काम्पिल्य में पर्यटकों के अनुभव को और अधिक आकर्षक एवं ज्ञानवर्धक बनाने के लिए करीब 2.37 करोड़ रुपए की धनराशि से चार इंटरैक्टिव इंटरप्रिटेशन इंस्टॉलेशन स्थापित किए जाएंगे। इन इंस्टॉलेशनों के माध्यम से द्रौपदी के जन्म, द्रौपदी और श्रीकृष्ण की मित्रता, द्रौपदी के स्वयंवर तथा कपिल मुनि के आश्रम में दी जाने वाली शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण पौराणिक प्रसंगों को आधुनिक तकनीक के जरिए जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इस माध्यम से आगंतुकों को महाभारत कालीन इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को समझने का एक नया और प्रभावी अनुभव प्राप्त होगा।

रामेश्वर नाथ मंदिर को मिलेगा भव्य प्रवेश द्वार

पर्यटन विकास योजना के तहत काम्पिल्य के प्राचीन रामेश्वर नाथ मंदिर को भव्य स्वरूप देने की तैयारी तेज हो गई है। इसी कड़ी में यहां लगभग 30 लाख रुपए से अधिक धनराशि से आकर्षक और पारंपरिक स्थापत्य शैली पर आधारित एक भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण किया जाएगा, जो दूर से ही श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करेगा। मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान राम के अनुज शत्रुघ्न ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी, जिसके दर्शन के लिए विशेषकर सावन महीने में भक्तों का जनसैलाब उमड़ता है। 

वहीं, पर्यटकों को स्थल के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व समझाने के लिए भव्य स्टोन स्टोरी बोर्ड इंटरप्रिटेशन पैनल लगाए जाएंगे। इससे न केवल उनकी इतिहास के प्रति समझ बढ़ेगी, बल्कि उनका पर्यटन अनुभव और समृद्ध होगा।

पर्यटक सुविधाओं पर विशेष जोर 

काम्पिल्य में पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए करीब 55 लाख रुपए की धनराशि से आधुनिक टूरिस्ट फैसिलिटी सेंटर भी विकसित किया जाएगा। जिसके अंतर्गत साफ-सुथरे शौचालय, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था, आराम के लिए विश्राम स्थल, कैफेटेरिया और कार्यालय जैसी सभी जरूरी सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध होंगी, ताकि आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।

‘काम्पिल्य का प्राचीन गौरव पुन: स्थापित करने का प्रयास’

अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि ‘महाभारत कालीन काम्पिल्य, जो कभी पांचाल की राजधानी रहा, आज भी अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत के कारण पर्यटन मानचित्र पर खास पहचान रखता है। मान्यता है कि यहीं द्रौपदी का जन्म और स्वयंवर हुआ था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार प्रदेश को 12 विशिष्ट पर्यटन सर्किटों में विभाजित किया गया है, जिनमें रामायण और इको सर्किट के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। महाभारत सर्किट का विकास भगवान कृष्ण के दुनियाभर में फैले अनुयायियों को आकर्षित करेगा। काम्पिल्य, जैन धर्म के 13वें तीर्थंकर भगवान विमलनाथ की जन्मस्थली और निकट स्थित संकिसा भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र स्थलों में भी शामिल है। प्रदेश सरकार काम्पिल्य के सर्वांगीण विकास के जरिए उसके प्राचीन गौरव को पुनर्स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।’

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Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय समाचार सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
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