मासूम की टाँग कटने के मामले में एफआईआर में सच्चाई का घोंटा गला, पुलिस की कार्यवाही पर गंभीर सवालों का घेरा
(संवाददाता योगेन्द्र प्रताप सिंह, जलेसर)
जलेसर। एटा। उत्तर प्रदेश। जनपद एटा में जलेसर के थाना शकरौली क्षेत्र के ग्राम वलीदादपुर में चार वर्षीय मासूम उवेश कुमार के गंभीर रूप से घायल हुआ। इस प्रकरण में दर्ज एफआईआर संख्या 0095 को लेकर पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने ऐसे गंभीर आरोप लगाए, जिन्होंने पुलिस की प्रारंभिक कार्यवाही को सवालों के घेरे में ला खड़ा कर दिया है। पीड़ित परिवार का आरोप है, कि 26 जून 2026 की सुबह करीब 7 बजे खेल रहे मासूम को एक बैलगाड़ी ने उसकी टाँग को बुरी तरह से कुचल दिया। परिजनों का कहना है, कि बैलगाड़ी चालक मौके से फरार हो गया और गंभीर रूप से घायल बच्चे को तत्काल उपचार के लिए आगरा ले जाया गया, जहाँ उसका इलाज जारी है।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में घटना स्थल पर मौके पर मौजूद महिलाओं की चीख-पुकार सुनाई देने लगी, पीड़ित पक्ष का दावा है, कि यह वीडियो उनके आरोपों की पुष्टि करता है, कि दुर्घटना बैलगाड़ी से हुई है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र एवं आधिकारिक रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। सबसे गंभीर आरोप एफआईआर को लेकर हैं। परिजनों और ग्रामीणों का कहना है, कि रिपोर्ट में जिस व्यक्ति का नाम आरोपी के रूप में दर्ज किया है, वह वास्तविक बैलगाड़ी चालक नहीं है। उनका यह भी आरोप है, कि दुर्घटना में प्रयुक्त वाहन का विवरण भी वास्तविक घटना से अलग स्थान पर दर्ज किया है। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल एक त्रुटि नहीं बल्कि निष्पक्ष विवेचना पर गंभीर प्रश्न खड़े करने वाला मामला होगा। ग्रामीणों का कहना है, कि सच्चाई सामने लाने के लिए वायरल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, घटनास्थल के साक्ष्य तथा अन्य उपलब्ध प्रमाणों की वैज्ञानिक एवं निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
उनका मानना है, कि वास्तविक दोषी की पहचान कर बैलगाड़ी चालक विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही होना अति आवश्यक है। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है, कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, यदि एफआईआर में किसी प्रकार की गड़बड़ी या लापरवाही पाई जाए तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध भी कानून के अनुसार कार्यवाही की जानी चाहिए। साथ ही घायल मासूम के समुचित उपचार और आर्थिक सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यह मामला अब केवल एक परिवार की पीड़ा तक सीमित नहीं है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है, कि क्या विवेचना उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जाँच निष्पक्ष होगी, या फिर उठ रहे सवालों का समाधान किए बिना मामला आगे बढ़ा दिया जाएगा, अब पूरे मामले पर निगाहें पुलिस विवेचना और प्रशासनिक जाँच पर टिकी हैं। जाँच के तथ्य ही तय करेंगे कि पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई दिखाई देती है।
