घोर लापरवाही: 1 साल से जमीन पर पड़े हाईटेंशन तार ने ली 8 वर्षीय मासूम की जान, ग्रामीणों में भारी आक्रोश |

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Manoj Jauhri
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित...
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शमशाबाद/फर्रुखाबाद।

बिजली विभाग की कथित तौर पर एक बेहद शर्मनाक और जानलेवा लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार का चिराग बुझा दिया। शमशाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम पुलियापुर-चंपातपुर (अलियापुर) में गुरुवार दोपहर खेत से घर लौट रहे एक 8 वर्षीय मासूम की जमीन पर पड़े हाईटेंशन लाइन के करंट प्रवाहित तार की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई।

इस हृदयविदारक घटना के बाद से पूरे गांव में शोक की लहर है और ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। परिजनों का सीधा और गंभीर आरोप है कि हाईटेंशन लाइन का यह तार पिछले करीब एक वर्ष से टूटा पड़ा था, जिसकी कई बार शिकायत की गई थी। लेकिन कुंभकर्णी नींद सोए बिजली विभाग ने इस खतरे को हटाने की जहमत नहीं उठाई, जिसकी कीमत एक मासूम को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

बारिश के बीच लौटते समय हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अलियापुर निवासी सुरजी जाटव का 8 वर्षीय पुत्र मयंक गुरुवार दोपहर करीब 1:30 बजे अपने भाई अंकुर और बाबा सोनेलाल के साथ खेत पर मक्का की रखवाली करने गया था। इसी बीच अचानक तेज बारिश शुरू हो गई, जिससे बचने के लिए तीनों घर वापस लौट रहे थे।

गांव के पास ही खेत के किनारे हाईटेंशन लाइन का टूटा हुआ तार जमीन पर पड़ा था, जिसमें करंट दौड़ रहा था। अनजाने में मयंक का पैर उस तार पर पड़ गया और वह बुरी तरह तड़पकर जमीन पर गिर पड़ा। साथ मौजूद बच्चों के शोर मचाने पर बाबा सोनेलाल ने हिम्मत दिखाई और लाठी की मदद से मयंक को तार से अलग किया। परिजन आनन-फानन में उसे घर लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक मासूम दम तोड़ चुका था।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, उठ रहे गंभीर सवाल

सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे मृतक के चाचा ने रोते हुए विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। मयंक पांच भाइयों में तीसरे नंबर का था, उसकी मौत के बाद मां ललिता देवी और पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

इस दर्दनाक हादसे ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब मिलना बेहद जरूरी है:

  1. एक साल की सुस्ती क्यों? यदि हाईटेंशन लाइन का तार एक वर्ष से क्षतिग्रस्त था और इसकी शिकायतें भी की गई थीं, तो इसे पूरी तरह से वहां से हटाया क्यों नहीं गया?
  2. निगरानी में चूक: जमीन पर पड़े इस जानलेवा तार की नियमित निगरानी करने में विभाग क्यों नाकाम रहा?
  3. हत्या या हादसा? क्या विभाग की इस आपराधिक लापरवाही को सिर्फ एक ‘हादसा’ मान लिया जाए या इसे एक मासूम की जान लेने का जिम्मेदार ठहराया जाए?
  4. कार्रवाई कब होगी? ऐसे गंभीर मामलों में केवल जांच का ढोंग करने के बजाय जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई कब सुनिश्चित होगी?

विभागीय सफाई: जांच के बाद होगी कार्रवाई

मामले पर जब बिजली विभाग के अवर अभियंता (JE) जुनेद आलम से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि पूर्व में बाढ़ के दौरान यह लाइन क्षतिग्रस्त हुई थी, जिसके बाद नई केबल डालकर आपूर्ति चालू कर दी गई थी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जमीन पर पड़े पुराने तार में करंट कैसे आया, इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई होगी।

यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह जिला प्रशासन और बिजली विभाग के लिए एक कड़ा सबक है। ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषी अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड कर उन पर मुकदमा दर्ज किया जाए, ताकि भविष्य में किसी और मासूम को इस तरह अपनी जान न गंवानी पड़े।

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Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय समाचार सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
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