प्राइवेट स्कूल पर बच्चों का रिजल्ट रोकने का आरोप, पिता ने फेसबुक लाइव कर डीएम से लगाई न्याय की गुहार |

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फर्रुखाबाद/फतेहगढ़/

जिले के एक निजी स्कूल पर फीस को लेकर अभिभावक का मानसिक उत्पीड़न करने और बच्चों का वार्षिक परीक्षा परिणाम रोकने का गंभीर आरोप लगा है। मामला उस समय तूल पकड़ गया जब पीड़ित अभिभावक ने फेसबुक लाइव कर अपनी आपबीती सुनाई और सीधे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर न्याय की मांग की। घटना के बाद सोशल मीडिया पर स्कूल प्रबंधन की कार्यशैली को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

जानकारी के अनुसार फतेहगढ़ निवासी व्यापारी सचिन गुप्ता के दो बच्चे याकूतगंज स्थित ज्ञान फोर्ट स्कूल में पढ़ते हैं। एक बच्चा यूकेजी और दूसरा कक्षा तीन का छात्र है। सचिन गुप्ता का आरोप है कि वह पिछले कुछ समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, जिसकी जानकारी उन्होंने पहले ही स्कूल प्रबंधन को दे दी थी। उनका कहना है कि स्कूल प्रशासन ने उनकी परिस्थितियों को देखते हुए फीस तिमाही आधार पर जमा करने की सहमति दी थी।

पीड़ित पिता का आरोप है कि सहमति बनने के बावजूद स्कूल की ओर से लगातार समय से पहले फीस जमा कराने का दबाव बनाया जाता रहा। उन्होंने बताया कि जब वह बच्चों का वार्षिक परीक्षा परिणाम लेने स्कूल पहुंचे तो प्रबंधन ने बकाया फीस का हवाला देकर रिजल्ट देने से इनकार कर दिया।

आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने न केवल रिजल्ट रोक दिया बल्कि बच्चों की टीसी कटवाकर स्कूल छोड़ने की भी बात कही। इससे आहत सचिन गुप्ता ने स्कूल प्रबंधक विमल राठौर से मुलाकात करने की कोशिश की, लेकिन उनका आरोप है कि स्कूल कर्मचारियों ने उन्हें प्रबंधक से मिलने तक नहीं दिया।

स्कूल के रवैये से परेशान अभिभावक ने सोशल मीडिया पर फेसबुक लाइव कर पूरी घटना सार्वजनिक कर दी। वीडियो वायरल होने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। इसके बाद सचिन गुप्ता सीधे जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के पास पहुंचे और लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की।

शिकायत में सचिन ने बताया कि उन्होंने फतेहगढ़ नवदिया क्षेत्र में एक प्लॉट खरीदा है, जिसकी करीब 16 हजार रुपये मासिक किस्त जा रही है। इसी वजह से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है और वह एकमुश्त फीस जमा करने में असमर्थ हैं।

वहीं, दूसरी ओर ज्ञान फोर्ट स्कूल प्रशासन ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। स्कूल की रिसेप्शन इंचार्ज रचना कटियार का कहना है कि अभिभावक द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं और स्कूल की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।

फिलहाल मामला जिला प्रशासन तक पहुंच चुका है। अब देखना होगा कि जांच के बाद प्रशासन क्या कार्रवाई करता है। वहीं, इस घटना ने निजी स्कूलों की फीस नीति और अभिभावकों पर बढ़ते दबाव को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

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