Farrukhabad News : बिना वारंट घर में घुसकर कार्रवाई: 16 पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश, CCTV से खुली ‘फर्जी कहानी’

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कायमगंज में बिना वारंट घर में घुसकर कार्रवाई: 16 पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश, CCTV से खुली ‘फर्जी कहानी’

विशेष न्यायाधीश का सख्त रुख — दो दरोगा समेत 16 पर मुकदमा दर्ज होगा, थाना प्रभारी को तलब

कायमगंज/फर्रुखाबाद।

जनपद फर्रुखाबाद के कायमगंज क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। विशेष न्यायाधीश शैलेंद्र सचान ने बिना वारंट घर में घुसकर तलाशी लेने, मारपीट करने और लूटपाट के आरोप में दो दरोगा सहित कुल 16 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने यह भी माना कि पुलिस ने न्यायालय को गुमराह करने के लिए फर्जी रिपोर्ट पेश की।

CCTV फुटेज से खुला राज

मोहल्ला कला खेल मऊ रशीदाबाद निवासी शायदा बेगम की ओर से दायर प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया था कि 26 जनवरी की आधी रात पुलिस उनके घर में जबरन घुस गई और परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट करते हुए उनके पति मुख्तियार खां, भतीजे असद खान और देवर तारिक खान को उठा ले गई।

पुलिस ने बाद में दावा किया कि इन लोगों को 28 जनवरी को अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार किया गया।

मामले की सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने क्षेत्र की CCTV फुटेज मंगवाई, तो पुलिस की कहानी झूठी साबित हो गई। फुटेज में साफ दिखाई दिया कि गिरफ्तारी पुलिस द्वारा बताए गए समय से पहले ही हो चुकी थी।

इन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई

कोर्ट के आदेश के बाद दरोगा सोमवीर, दरोगा जितेंद्र कुमार, हेड कांस्टेबल धर्मेंद्र तिवारी और सिपाही विजय गुर्जर, सचिन कुमार, जितेंद्र सिंह, विकास बाबू, पवन चाहर समेत 8 अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

थानाध्यक्ष मदन मोहन चतुर्वेदी को भी अदालत ने कड़ी फटकार लगाते हुए 20 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।

छात्र की परीक्षा भी छूटी

घटना का एक चिंताजनक पहलू यह भी सामने आया कि जिस समय युवक को पुलिस ने हिरासत में रखा, उसी दिन उसकी कक्षा 11 की हिंदी की परीक्षा थी। गवाहों और फुटेज के आधार पर यह भी स्पष्ट हुआ कि पुलिस की गिरफ्तारी संबंधी रिपोर्ट पूरी तरह भ्रामक थी।

निष्पक्ष जांच के निर्देश

अदालत ने पुलिस अधीक्षक को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो।

निष्कर्ष

यह मामला न केवल पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि न्यायिक व्यवस्था की सतर्कता को भी दर्शाता है, जहां तकनीकी साक्ष्य के आधार पर सच्चाई सामने आई।

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