उत्तर प्रदेश की राजनीति और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के भीतर एक बहुत बड़ी हलचल और सियासी उलटफेर की खबर सामने आ रही है। सूत्रों से मिली बेहद पुख्ता जानकारी के मुताबिक, आरएलडी के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय जल्द ही पार्टी को बड़ा झटका देकर कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं।
बताया जा रहा है कि राय लगातार कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में हैं और उनकी ज्वाइनिंग को हरी झंडी भी मिल चुकी है। इस संभावित टूट की भनक आरएलडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को लग गई है। जिसके बाद आनन-फानन में डैमेज कंट्रोल करते हुए जयंत चौधरी ने पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता अनुपम मिश्रा को उत्तर प्रदेश का कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है।
संसद के आगामी सत्रों और सूबे की भावी राजनीतिक रणनीतियों के बीच राष्ट्रीय लोकदल ने संगठनात्मक स्तर पर यह बेहद चौंकाने वाला फेरबदल किया है। केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने अनुपम मिश्रा को प्रदेश संगठन की कमान सौंपते हुए कार्यवाहक अध्यक्ष पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। अनुपम मिश्रा लंबे समय से जयंत चौधरी के सबसे करीबी और भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल रहे हैं। वे संगठन को मजबूत करने और मीडिया में पार्टी का पक्ष रखने में हमेशा सक्रिय भूमिका निभाते आए हैं।
हालांकि, इस अचानक हुई नियुक्ति के पीछे की असली कहानी अंदरूनी बगावत से जुड़ी है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने अभी तक रामाशीष राय को उनके मूल प्रदेश अध्यक्ष पद से आधिकारिक रूप से हटाया नहीं है, बल्कि उनके समानांतर अनुपम मिश्रा को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाकर संगठन को बिखरने से बचाने की कवायद शुरू कर दी है।
राजनीतिक हलकों और सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में विपक्षी खेमा यानी कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) का गठबंधन लगातार आरएलडी के भीतर सेंधमारी की कोशिशों में जुटा हुआ है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की कोर टीम जयंत चौधरी के करीबियों और पुराने नेताओं को सपा-कांग्रेस गठबंधन के नाम पर अपनी ओर आकर्षित कर रही है।
दावा किया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय को कांग्रेस आलाकमान ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मजबूत सीट से चुनाव लड़वाने का पक्का भरोसा दिया है। उनकी ज्वाइनिंग की स्क्रिप्ट पूरी तरह तैयार हो चुकी है और किसी भी दिन वे औपचारिक रूप से दिल्ली या लखनऊ में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि रामाशीष राय कांग्रेस में जाते हैं, तो यह जयंत चौधरी के लिए पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक बड़ा झटका होगा। यही वजह है कि अनुपम मिश्रा की त्वरित नियुक्ति कर पार्टी प्रदेश भर के कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने और संगठन में किसी भी संभावित टूट को रोकने की रणनीति पर दिन-रात काम कर रही है।
