कायमगंज/ फर्रुखाबाद |
फर्रुखाबाद पुलिस ने जिले के सबसे चर्चित और सनसनीखेज हत्याकांडों में से एक लखनपुर नरसंहार के मुख्य दोषी को आखिरकार 28 वर्षों बाद गिरफ्तार कर लिया। उम्रकैद की सजा पाए आरोपी किशोरी लाल ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अपनी पहचान बदल ली थी और नोएडा में ‘दीपक’ नाम से दर्जी का काम कर रहा था। लेकिन कायमगंज पुलिस ने मुखबिर की सटीक सूचना पर उसे दबोच लिया।

यह मामला 11 अगस्त 1991 की उस खौफनाक रात का है, जब लखनपुर गांव में गुलजारी लाल, उनकी पत्नी रामवती, तीन बेटों राकेश, उमेश और धर्मेंद्र तथा पड़ोसी बाबूराम की धारदार हथियारों से निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस सामूहिक हत्याकांड ने पूरे इलाके को दहला दिया था।
पुलिस के अनुसार, किशोरी लाल को वर्ष 1996 में जमानत मिली थी, जिसके बाद वह फरार हो गया। तब से वह लगातार अपनी पहचान छिपाकर नोएडा में रह रहा था। सीओ राजेश कुमार द्विवेदी और प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार शुक्ला के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने बिरियन तिराहे के पास उसे गिरफ्तार कर लिया।
9 बीघा जमीन बेचकर लड़ी न्याय की लड़ाई
इस नरसंहार के समय महज छह साल के रहे मदन लाल चारपाई के नीचे छिपकर अपनी जान बचाने में सफल हुए थे। वही इस पूरे मामले के एकमात्र चश्मदीद गवाह बने। उन्होंने अपने परिवार को न्याय दिलाने के लिए दशकों तक अदालतों में लड़ाई लड़ी। इस संघर्ष में परिवार की 9 बीघा जमीन तक बिक गई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
हाईकोर्ट से आरोपियों के बरी होने के बाद मदन लाल सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी दोषियों को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। अब मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है और उनका कहना है कि वर्षों बाद न्याय की उम्मीद पूरी होती दिखाई दे रही है।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी कर उसे न्यायालय में पेश कर दिया है।
