फर्रुखाबाद न्यूज़:- आल्हा की विलुप्त होती विरासत को संजोने में जुटे मशहूर गायक बलराम सिंह यादव |

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Manoj Jauhri
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित...
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शमशाबाद/फर्रुखाबाद।

आधुनिकता की दौड़ में हमारी लोक संस्कृति और लोक परंपराएं धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं। कभी गांव-गांव में वीर रस से ओतप्रोत आल्हा गायन की गूंज सुनाई देती थी, लेकिन समय के साथ यह समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर अब सिमटती जा रही है। ऐसे समय में शमशाबाद क्षेत्र के ग्राम बाजीदपुर निवासी प्रसिद्ध आल्हा गायक बलराम सिंह यादव इस विरासत को जीवित रखने का सराहनीय प्रयास कर रहे हैं।

बलराम सिंह यादव अपनी पूरी टीम के साथ शमशाबाद क्षेत्र के विभिन्न गांवों में पहुंचकर आल्हा गायन के माध्यम से ग्रामीणों को अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। उनके ओजपूर्ण गायन को सुनने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित होते हैं और देर रात तक वीर रस से भरपूर आल्हा का आनंद लेते हैं।

बलराम सिंह यादव का कहना है कि आल्हा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है। यदि नई पीढ़ी को इससे नहीं जोड़ा गया तो आने वाले समय में यह लोक कला पूरी तरह विलुप्त हो सकती है। इसलिए वह गांव-गांव जाकर लोगों को अपनी संस्कृति के प्रति जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं।

उनके इस अभियान में ढोलक वादक लालाराम वर्मा, हारमोनियम वादक आदर्श कुमार, जीका वादक धर्मेंद्र कठेरिया, चिमटा वादक बबलू ठाकुर सहित पूरी टीम सहयोग कर रही है। ग्रामीणों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कलाकारों के प्रयासों से ही हमारी लोक संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सकेगी।

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Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय समाचार सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
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