फर्रुखाबाद/

जिले में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ का खतरा गहराने लगा है। नदी अब चेतावनी बिंदु के बेहद करीब पहुंच चुकी है, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। पांचाल घाट पर गंगा का पानी पक्के घाट तक पहुंच गया है, जबकि तटवर्ती गांवों में रहने वाले लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं।
शनिवार सुबह गंगा नदी का जलस्तर 136.25 सेंटीमीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी स्तर से महज 50 सेंटीमीटर नीचे है। जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए जिला प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
बढ़ते पानी के कारण पांचाल घाट पर पक्के घाट तक गंगा की लहरें पहुंच गई हैं। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को सतर्क करने के लिए घाट पर लाल चेतावनी झंडियां लगा दी गई हैं। वहीं उत्तरी बंधा क्षेत्र में रहने वाले कई परिवारों की झोपड़ियों तक पानी पहुंचने लगा है, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार नरौरा बांध से 48,653 क्यूसेक और हरिद्वार से 69,459 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह पानी छोड़ा जाता रहा तो अगले कुछ दिनों में गंगा का जलस्तर और बढ़ सकता है।
सुंदरपुर और तीस राम की मड़ैया सहित कई तटवर्ती गांवों के पास गंगा का पानी पहुंच चुका है। सोता नल की तेज धार के कारण कटान का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीण अपने घरों और खेती को लेकर चिंतित हैं और प्रशासन से सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।
हालांकि रामगंगा नदी से फिलहाल राहत की खबर है। खोह, हरेली और रामनगर से 1,119 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बावजूद रामगंगा का जलस्तर अभी खतरे के स्तर से नीचे बना हुआ है।
प्रशासन ने सिंचाई, राजस्व, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। साथ ही गंगा किनारे रहने वाले लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाएं।
