फर्रुखाबाद/
शहर में झूलती और जर्जर बिजली लाइनों से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। विद्युत विभाग ने सरकार के बिजनेस प्लान के तहत लगभग छह करोड़ रुपये की लागत से शहर की बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। योजना के अंतर्गत 63 चिन्हित क्षेत्रों में पुरानी खुली बिजली लाइनों की जगह सुरक्षित बंच केबल बिछाई जाएगी। साथ ही ओवरलोडिंग की समस्या से निपटने के लिए नए ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे तथा जरूरत के अनुसार पुराने ट्रांसफार्मरों की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी।
नगरीय अधिशासी अभियंता बृजभान सिंह ने बताया कि शहर में लंबे समय से जर्जर और नीचे झूल रहे बिजली के तार दुर्घटनाओं के साथ-साथ बार-बार होने वाले फॉल्ट का कारण बन रहे हैं। तेज हवा, बारिश या अन्य कारणों से तारों में खराबी आने पर पूरे फीडर की बिजली बंद करनी पड़ती है, जिससे हजारों उपभोक्ताओं को घंटों तक बिजली संकट झेलना पड़ता है। नई बंच केबल लगने के बाद बिजली आपूर्ति अधिक सुरक्षित, सुचारु और भरोसेमंद होगी।
योजना के तहत नारायणपुर, गुंजन विहार कॉलोनी, जेएनवी रोड, हाथीखाना, पटेल नगर (नेकपुर), बढ़पुर, क्रिश्चियन फील्ड, खटकपुरा इज्जत खां, मन्नीगंज, शोरावली गली, मोहल्ला तलैया, संगत सहित शहर के 63 चिन्हित इलाकों में बंच केबल डाली जाएगी। इन क्षेत्रों में लंबे समय से तारों के झूलने और बार-बार फॉल्ट होने की शिकायतें मिल रही थीं।
विद्युत विभाग का कहना है कि गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ने से ट्रांसफार्मरों पर अतिरिक्त भार पड़ता है, जिससे उनके खराब होने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इसे देखते हुए योजना में नए ट्रांसफार्मर स्थापित करने के साथ कई स्थानों पर पुराने ट्रांसफार्मरों की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी, ताकि भविष्य में बढ़ते बिजली लोड का सामना आसानी से किया जा सके।
अधिशासी अभियंता ने बताया कि बंच केबल बिछाने और ट्रांसफार्मरों के उन्नयन के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है। कार्यदायी संस्था का चयन होते ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। विभाग का लक्ष्य है कि परियोजना पूरी होने के बाद शहर के हजारों उपभोक्ताओं को बार-बार होने वाले फॉल्ट, अनावश्यक शटडाउन और झूलती बिजली लाइनों की समस्या से स्थायी राहत मिले तथा लोगों को अधिक सुरक्षित और निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई जा सके।
यह परियोजना न केवल शहर की बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाएगी, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी कम करेगी और भविष्य की बढ़ती बिजली आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वितरण तंत्र को अधिक सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
