मानसून सत्र से पहले दल-बदल मामलों पर बड़ा फैसला ले सकते हैं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

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मानसून सत्र से पहले दल-बदल मामलों पर बड़ा फैसला ले सकते हैं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष Om Birla संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और शिवसेना (यूबीटी) के बागी सांसदों से जुड़े दल-बदल मामलों में महत्वपूर्ण फैसला सुना सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले इस संबंध में निर्णय लिया जा सकता है।

स्पीकर ओम बिरला दोनों मूल राजनीतिक दलों और उनके बागी गुटों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर चुके हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संसदीय, कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञों से भी राय ली जा रही है। साथ ही दल-बदल विरोधी कानून से जुड़े पूर्व मामलों और न्यायिक मिसालों की समीक्षा की जा रही है, ताकि निर्णय पूरी तरह कानूनी और संवैधानिक दायरे में रहे।

टीएमसी के 20 सांसदों पर संकट

2024 के लोकसभा चुनाव में All India Trinamool Congress ने 29 सीटें जीती थीं। एक सांसद के निधन के बाद वर्तमान में एक सीट रिक्त है। पार्टी के 20 सांसदों ने कथित रूप से बगावत कर Nationalist Citizens Party of India का दामन थाम लिया है।

बागी सांसदों ने लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है तथा केंद्र की National Democratic Alliance सरकार को समर्थन देने और गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई है। इस मामले में टीएमसी महासचिव Abhishek Banerjee ने स्पीकर से मुलाकात कर बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है।

शिवसेना (यूबीटी) में भी बढ़ा विवाद

महाराष्ट्र में Shiv Sena (Uddhav Balasaheb Thackeray) के टिकट पर चुने गए 9 सांसदों में से 6 सांसद Eknath Shinde के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। पार्टी नेताओं Anil Desai और Arvind Sawant ने स्पीकर से मुलाकात कर संविधान और दसवीं अनुसूची के प्रावधानों को लागू करने की मांग की।

उद्धव गुट का कहना है कि बागी सांसदों को दल-बदल विरोधी कानून के तहत संरक्षण नहीं मिल सकता, क्योंकि केवल सांसदों के समूह के विलय को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती।

दल-बदल कानून की व्याख्या पर बहस

टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) दोनों का तर्क है कि संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार अयोग्यता से छूट तभी मिल सकती है, जब किसी राजनीतिक दल के कम से कम दो-तिहाई हिस्से का किसी अन्य दल में विधिवत विलय हो। केवल सांसदों या विधायकों के समूह के अलग होने को विलय नहीं माना जा सकता।

संसद में बदल सकती है बैठने की व्यवस्था

लोकसभा सचिवालय मानसून सत्र के लिए सांसदों की नई बैठने की व्यवस्था पर भी विचार कर रहा है। टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) के बागी गुटों के अलावा Dravida Munnetra Kazhagam ने भी कांग्रेस से अलग बैठने की मांग की है। पार्टी ने हाल ही में कांग्रेस से अपना पुराना गठबंधन समाप्त कर Tamilaga Vettri Kazhagam के साथ नया राजनीतिक गठबंधन बनाया है।

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