कायमगंज/फर्रुखाबाद/
कभी अपनी मिठास, सुगंध और गुणवत्ता के लिए देश-विदेश में पहचान बनाने वाला कायमगंज का विश्वप्रसिद्ध दशहरी आम इस वर्ष मौसम की मार का शिकार हो गया है। क्षेत्र के हजारों बागवान और किसान इस समय भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। आम की फसल का आकार सामान्य वर्षों की तुलना में काफी छोटा रह गया है, जिससे बाजार में इसकी मांग घट गई है और दामों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
कायमगंज क्षेत्र के आम बागों में इन दिनों तुड़ाई, ग्रेडिंग, पैकिंग और लोडिंग का कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन बागवानों के चेहरों पर इस बार खुशी की जगह चिंता साफ दिखाई दे रही है। किसानों का कहना है कि पूरे वर्ष की मेहनत और लाखों रुपये की लागत के बावजूद उन्हें फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
मई की असामान्य ठंड ने रोक दिया आम का विकास
विशेषज्ञों और बागवानों के अनुसार मई माह में सामान्य से अधिक ठंडक और मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव ने दशहरी आम के विकास को प्रभावित किया। जिस समय फलों का आकार बढ़ना चाहिए था, उस दौरान तापमान और मौसम की परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहीं। परिणामस्वरूप अधिकांश फल सामान्य आकार प्राप्त नहीं कर सके और ‘बौने’ रह गए।
छोटे आकार के आमों की बाजार में मांग कम होने के कारण व्यापारियों ने भी खरीद मूल्य घटा दिए हैं। इससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
जयपुर मंडी में मंदी का माहौल, लागत निकालना भी बना चुनौती
क्षेत्र के प्रमुख आम उत्पादक दिनेश गंगवार, मुकेश शाक्य और अदील खान ने बताया कि राजस्थान की प्रमुख जयपुर फल मंडी में इस समय दशहरी आम के भाव मात्र 25 से 28 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। यह मूल्य किसानों की अपेक्षाओं से काफी कम है।
उन्होंने बताया कि बाग से मंडी तक परिवहन, पैकिंग, मजदूरी और अन्य खर्चों को जोड़ने के बाद यह कीमत लागत निकालने के लिए भी पर्याप्त नहीं है। कई किसानों को माल भेजने पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में अनेक बागवान मंडियों में माल भेजने से भी बच रहे हैं।
70 प्रतिशत तक फसल को नुकसान, उत्पादन में ऐतिहासिक गिरावट
अनुभवी बागवानों का कहना है कि इस वर्ष आम की फसल को पिछले कई वर्षों में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण कुल संभावित उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हो चुका है। केवल 30 प्रतिशत फसल ही किसी प्रकार बच पाई है।
इतना ही नहीं, मौसम के बार-बार बदलते मिजाज का असर आम की गुणवत्ता और प्राकृतिक मिठास पर भी पड़ा है। किसानों का कहना है कि इस बार स्वाद और आकार दोनों प्रभावित हुए हैं, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।
बेमौसम बारिश और आंधी ने बढ़ाई मुश्किलें
किसानों के अनुसार इस वर्ष पछुआ और पुरवाई हवाओं के लगातार बदलते रुख ने फसल चक्र को सबसे अधिक प्रभावित किया। आम के बौर आने और फल बनने के महत्वपूर्ण समय पर आई तेज आंधियों और बेमौसम बारिश ने पेड़ों पर लगे हजारों टन फलों को जमीन पर गिरा दिया।
कई बागों में फसल का बड़ा हिस्सा शुरुआती दौर में ही नष्ट हो गया। मौसम की यह मार केवल दशहरी आम तक सीमित नहीं रही, बल्कि लंगड़ा, चौसा, फजली और अन्य स्थानीय प्रजातियों पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिला है।
संकट में राहत बन रहे बाहरी व्यापारी
हालांकि विपरीत परिस्थितियों के बीच किसानों को कुछ राहत भी मिल रही है। आम उत्पादक अन्ने खां और ऋषि गंगवार ने बताया कि स्थानीय स्तर पर और पड़ोसी जिलों व राज्यों से आने वाले व्यापारी सीधे बागों तक पहुंच रहे हैं।
वर्तमान में शाहजहांपुर, हरदोई, मैनपुरी, आगरा सहित हरियाणा राज्य के फल व्यापारी अपनी गाड़ियां लेकर सीधे कायमगंज के बागों में पहुंच रहे हैं और वहीं से आम की खरीद कर रहे हैं। इससे किसानों को मंडी के आढ़त, भाड़े और अन्य अतिरिक्त खर्चों से राहत मिल रही है।
सबसे बड़ी बात यह है कि अधिकांश व्यापारी मौके पर ही नकद भुगतान कर रहे हैं, जिससे किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता मिल रही है और वे कुछ हद तक नुकसान की भरपाई कर पा रहे हैं।
सरकारी सहायता और विशेष पैकेज की मांग
लगातार हो रहे नुकसान से परेशान किसानों और बागवानों ने सरकार से विशेष राहत पैकेज, फसल क्षति का सर्वेक्षण और आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सहायता नहीं मिली तो क्षेत्र के हजारों आम उत्पादकों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
कायमगंज का दशहरी आम वर्षों से देश की प्रमुख मंडियों में अपनी अलग पहचान रखता है, लेकिन इस बार मौसम की मार ने उसकी चमक फीकी कर दी है। अब किसानों की निगाहें आने वाले दिनों के मौसम और बाजार की स्थिति पर टिकी हैं, ताकि उन्हें अपनी मेहनत का कुछ बेहतर मूल्य मिल सके।
