फर्रुखाबाद।
बिजली विभाग के स्टोर से चार कंट्रोल पैनल गायब होने का मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। राजस्व वसूली, बिजली आपूर्ति और लाइनलॉस की समीक्षा करने पहुंचे मुख्य अभियंता राहुल नंदा के सामने स्टोर में रखे उपकरणों के रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट नहीं होने का मामला आया। मुख्य अभियंता ने पूरे प्रकरण की जानकारी लेकर संबंधित रिकॉर्ड, गेटपास और पैनलों की वास्तविक स्थिति की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि चारों कंट्रोल पैनल कहां गए और उन्हें किस प्रक्रिया के तहत जारी किया गया।
दरअसल, विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्य अभियंता ने कार्यकारी अभियंताओं, एसडीओ और अवर अभियंताओं से बिजली आपूर्ति, राजस्व वसूली, लाइनलॉस और विभागीय कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। इसी दौरान स्टोर में रखे कंट्रोल पैनलों का रिकॉर्ड खंगाला गया तो चार पैनलों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं मिली। मामला सामने आते ही अधिकारियों से संबंधित दस्तावेज और गेटपास की जानकारी मांगी गई।
जसमई सबस्टेशन के पैनल ने खोली रिकॉर्ड की पोल
मामले की कड़ी नवनिर्मित जसमई सबस्टेशन के लिए आवश्यक 33 केवी कंट्रोल पैनल से जुड़ी बताई जा रही है। सबस्टेशन के लिए पैनल की जरूरत पड़ने पर जब स्टोर से जानकारी मांगी गई तो पता चला कि संबंधित पैनल का गेटपास पहले ही काटा जा चुका था। हैरानी की बात यह रही कि गेटपास जारी होने के बावजूद पैनल जसमई सबस्टेशन तक पहुंचा ही नहीं था।
इसके बाद स्टोर के रिकॉर्ड और पैनल जारी करने की प्रक्रिया की जानकारी जुटाई गई। रिकॉर्ड में सामने आई स्थिति ने विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। मुख्य अभियंता ने पूरे मामले की तह तक जाने के लिए रिकॉर्ड की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
दो ठेकेदारों के पैनल, गेटपास एक के नाम!
जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की जानकारी है। अलग-अलग कार्यों से जुड़े दो ठेकेदारों के कंट्रोल पैनल एक ही ठेकेदार के नाम पर गेटपास काटकर जारी किए गए थे। बताया गया कि ये कंट्रोल पैनल अक्टूबर 2025 में कानपुर की एक फर्म को दिए गए थे, जबकि गेटपास फर्रुखाबाद की एक फर्म के नाम पर काटे गए थे।
चार कंट्रोल पैनलों के गायब होने की जानकारी के बाद अब विभागीय रिकॉर्ड, गेटपास, संबंधित फर्मों और पैनलों की वास्तविक उपलब्धता की जांच कराई जाएगी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि स्टोर से उपकरण निकालने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं।
पांच हाई लाइनलॉस फीडर भी जांच के घेरे में
बैठक में शहर के बिजली फीडरों पर बढ़ रहे लाइनलॉस को लेकर भी मुख्य अभियंता ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। शहर के पांच अधिक लाइनलॉस वाले फीडर चिन्हित कर उनकी जांच कराने को कहा गया है। संबंधित जूनियर इंजीनियरों को इन फीडरों पर बिजली की खपत, राजस्व वसूली और लाइनलॉस की वास्तविक स्थिति का परीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों को यह पता लगाने को कहा गया है कि जिन फीडरों पर लाइनलॉस अधिक है, उसके पीछे तकनीकी कारण हैं या अन्य वजहें। इसके साथ ही ट्रांसफार्मरों की नियमित जांच और उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखने पर भी जोर दिया गया।
30 सितंबर तक वसूली का लक्ष्य पूरा करने के निर्देश
राजस्व वसूली की समीक्षा के दौरान भी अधिकारियों को लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए गए। मुख्य अभियंता ने कहा कि 30 सितंबर तक निर्धारित राजस्व वसूली लक्ष्य हासिल किया जाए। इसके लिए बड़े बकायेदारों की सूची तैयार कर उनसे बकाया बिजली बिल की वसूली पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
बैठक में बिजली चोरी पर नियंत्रण, लाइनलॉस कम करने और फीडर स्तर पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों को विभागीय कार्यों में लापरवाही न बरतने तथा स्टोर में रखे उपकरणों का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने को कहा गया।

